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सरकार ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

  • हिमऊर्जा के तहत आवंटित हो चुकी हैं ये छोटी परियोजनाएं
  • पिछले 3 वर्षों से निर्माण कार्य शुरू न करने पर दी चेतावनी

आरपी नेगी। शिमला
प्रदेश की जयराम सरकार 1 से 5 मेगावाट तक विद्युत क्षमता की 225 परियोजनाओं के आवंटन को रद्द करने की तैयारी में हैं। हिमऊर्जा ने इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर जवाब मांगा है। प्रोजेक्ट आवंटन होने के 3 साल बीतने के बाद अभी तक इनकी डीपीआर रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। जबकि डीपीआर दो सालों के भीतर तैयार हो कर तीसरे साल से निर्माण कार्य भी शुरू हो जाना चाहिए।

निर्माण कार्य में सुस्त रवैये के चलते हिम ऊर्जा ने सख्त रूख अपना लिया है। अब इन प्रोजेक्टों के आबंटन को रद्द करने की तैयारी कर ली है। नियमों के मुताबिक प्रोजेक्ट अलॉट होने के 6 साल के भीतर इसे तैयार कर विद्युत उत्पादन शुरू करना होता है। 2 साल तक प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर हिमऊर्जा के पास सौंपनी पड़ती है।

हिमऊर्जा ने इन परियोजनाओं के लिए मांगे थे आवेदन

इसके साथ ही यह बताना पड़ता है कि प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य वह तय समय के भीतर पूरा कर देगा। डीपीआर अप्रूव होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है। कुछ परिस्थितियों में यदि निर्माण कार्य किसी कारण वश छह साल में पूरा नहीं होता तो उसे छूट दे दी जाती है। लेकिन इन परियोजनाओं में आबंटन के बाद कुछ भी प्रोग्रेस नहीं हुई है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व की वीरभद्र सिंह सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2015 में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ही इन परियोजनाओं को स्थापित करने की मंजूरी दी गई थी। हिमऊर्जा ने इन परियोजनाओं के लिए आवेदन मांगे थे। आवेदन आने के बाद उनकी स्क्रुटनिंग की गई। जो आवेदन सही पाए गए उन्हें इसका आबंटन किया गया था। इन प्रोजेक्टों को जो अलॉटमेंट लैटर जारी हुआ था उसमें ही यह बताया गया था कि छह सालों के भीतर उन्हें निर्माण कार्य पूरा करना है।

सतलुज, ब्यास, रावी व चिनाव बेसिन पर चिंहित

यमुना, सतलुज, ब्यास, रावी और चिनाब बेसिन पर इन प्रोजेक्टों के लिए चिंहित किया गया है। कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, सिरमौर, लाहौल-स्पीति, मंडी और शिमला जिला में यह प्रोजेक्ट लगने हैं। राज्य सरकार ने हिमाचल से संबंध रखने वाले युवाओं को इसमें कुछ रियायत भी दी थी। हिमऊर्जा इसके अलावा प्रदेश में कुछ अन्य स्थानों पर खुद भी छोटी परियोजनाओं को स्थापित करने जा रहा है। गत 17 मई को हिमऊर्जा की समीक्षा बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में सभी प्रोजेक्टों की सीमक्षा की गई थी।

इसमें सामने आया कि 225 प्रोजेक्टों पर कोई काम ही नहीं हो रहा है। ऐसा भी सामने आया कि जिन लोगों को यह प्रोजेक्ट आवंंटित हुए हैं वह इसके निर्माण कार्य में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं। हिमऊर्जा सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट स्थापित न होने से प्रदेश को नुकसान हो रहा है। इससे पैदा होने वाली बिजली की जो हिस्सेदारी हिमाचल को मिलनी प्रस्तावित है वह नहीं मिल पा रही है।

प्रदेश में 1 से 5 मेगावाट तक की 225 छोटी परियोजनाओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इनसे पूछा गया है कि प्रोजेक्ट निर्माण में देरी क्यों की गई है, क्या वह इन्हें स्थापित करने में इच्छुक हैं। नोटिस का जवाब आने के बाद इसे एक्जामिन किया जाएगा। कार्य करने में सक्षम न पाए जाने पर इन प्रोजेक्टों के आबंटन को रद्द कर दिया जाएगा। -डा. अजय शर्मा, सीईओ हिमऊर्जा

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