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रूसा का एग्जाम सिस्टम अब निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

5 साल से रिजल्ट लेट, शिक्षा विभाग बना रहा अब यह प्रस्ताव

दीपिका शर्मा। शिमला
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान यानी रूसा के झंझटों को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा फैसला ले सकती है। इस प्रणाली के तहत परीक्षा प्रक्रिया को निजी एजेंसी को देने पर विचार कर रहा है। उच्च शिक्षा विभाग को इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। विभाग इस पर काम कर रहा है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान रूसा की दिक्कतों को दूर करने का वादा अपने विजन डाक्यूमेंट में किया है। लेकिन इस प्रणाली को हटाना राज्य के वश में नहीं है। यदि ऐसा करते हैं तो केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट रुक जाएगी।

इसलिए सरकार अब इसमें ऐसे सुधार करने जा रही है, जिससे परीक्षाओं का रिजल्ट कम से कम समय पर निकले। वर्ष 2013 से लागू हुए रूसा के सेमेस्टर सिस्टम में प्रदेश विवि किसी भी साल समय पर रिजल्ट नहीं दे पाया है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग परीक्षा का काम एक ऐसी निजी एजेंसी को देने जा रहा है, जो यूजीसी से इंपैनल हो। रूसा के खिलाफ एबीवीपी के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने इससे पहले केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से भी इस बारे में पूछा था। लेकिन वहां से जवाब आया कि यदि राज्य ने सेमेस्टर सिस्टम बंद किया जाता है तो ग्रांट भी बंद हो जाएगी।

1.10 लाख युवा हर साल दे रहे हैं परीक्षा

रूसा के लागू होने के बाद हिमाचल में 1.10 लाख छात्र हर साल परीक्षाएं देते हैं। राज्य में इस समय 135 डिग्री कॉलेज हैं, जिनमें रूसा प्रणाली लागू है। इनमें से केवल 42 के पास ही नैक की ग्रेडिंग है। रूसा के तहत ग्रांट केवल नैक ग्रेडिंग वाले कॉलेजों को मिलती है। अब तक 292 करोड़ रुपये रूसा में राज्य को केंद्र सरकार से मिल चुके हैं।

कर्नाटक और महाराष्ट्र के मॉडल पर काम

शिक्षा विभाग ने इसके लिए कुछ अन्य राज्यों के सिस्टम को स्टडी भी किया है। पता चला है कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में निजी एजेंसी के हवाले रूसा एग्जाम सिस्टम है और यह अच्छी तरह से काम कर रहा है। एग्जाम करवाने के लिए एजेंसी के पास एक बेहतर टीम और विशेषज्ञ होते हैं। थर्ड पार्टी चैनल के बीच में आने से विश्वसनीयता भी बढ़ती है।

रूसा में सुधार का वादा किया था मंत्री ने

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विधानसभा के बजट सत्र में रूसा में सुधार का वादा किया हुआ है। इसके बाद ही अब विभागीय स्तर पर इस बारे में चिंतन जारी है। मंत्री ने यह भी माना था कि 2013 में इस प्रणाली को जल्दबाजी में कॉलेजों में लागू कर दिया गया, लेकिन प्रदेश विश्वविद्यालय ने अपने यहां पीजी में इसे अपनाया, जहां ज्यादा जरूरी था।

रूसा के तहत परीक्षा प्रणाली को प्राइवेट एजेंसी को देने का प्रपोजल हम बना रहे हैं। हमारा मकसद परीक्षाओं का रिजल्ट समय पर निकालना है। इस बारे में अंतिम फैसला सरकार को लेना है। -डॉ. अमर देव, निदेशक उच्च शिक्षा विभाग

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