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डॉ. परमिंद्र कौशल संभालेंगे कृषि विश्वविद्यालय की कमान

  • बिरसा मुंडा कृषि विवि में दे रहे थे सेवाएं
  • 20 देशों में शोधपत्र पढ़ चुके हैं डॉ. परमिंद्र

भूपेंद्र ठाकुर । सोलन
सोलन जिला के एक छोटे से गांव रामशहर के रहने वाले किसान के बेटे को नौणी विवि का कुलपति बनाया गया है। डॉ. परमिंद्र कौशल नौणी विवि की कमान संभालेंगे। इससे पूर्व वह झारखंड की बिरसा मुंडा कृषि विवि रांची के कुलपति थे। जिला सोलन के रहने वाले डॉ. परविंद्र कौशल का जन्म साधारण किसान परिवार में 1 अप्रैल, 1957 को हुआ। इससे पहले डॉ. कौशल डॉ. यशवंत सिंह परमार विवि नौणी में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं । प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए उनका योगदान सराहनीय है।

वर्ष 2010 से प्रदेश में जल प्रबंधन के द्वारा कृषि उत्पादन एवं ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने में सक्रिय कार्य किया। डॉ. कौशल अभी तक 20 देशों में अपने शोधपत्र पढ़ चुके है और 6 विश्वस्तरीय सम्मेलन में हिस्सा ले चुके हैं। विवि में काम करने का उनके पास काफी अनुभव है। इस लिए उनके अनुभव का फायदा विवि को भविष्य में मिल सकता है। डॉ. कौशल ने बताया कि उनका सपना है कि विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध व विस्तार पर उनका खास जोर रहेगा, ताकि विवि में होने वाले शोध कार्यों का लाभ किसानों को मिलें। वह स्वयं किसान हैं और किसानों को विवि से जोड़ा जाएगा।

ताकि उनकी आर्थिकी में सुधार हो। डॉ. परमिंद्र कौशल ने वर्ष 1978 में कृषि महाविद्यालय सोलन से फॉरेस्ट्री में स्नातकोत्तर उपाधि प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। शिक्षा व शोध में रुचि के कारण शिमला स्थित भारतीय वानिकी शोध एवं शिक्षा काउंसिल के केंद्र से अपना कार्य शुरु किया, ताकि शोध का कार्य कर सकें। वर्ष 1981 में उन्हें पंजाब विवि लुधियाना में सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया। उन्हें कॉमनवेल्थ फैलोशिप के तहत कनाडा में व फ्रांस सरकार की फैलोशिप से फ्रांस में पढ़ाई का मौका मिला।

बतौर एसोसिएट प्रो. शुरू किया था सफर

डॉ. परमिंद्र कौशल ने 1992 में नौणी यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवा आरंभ की। 2005 से 2009 तक झारखंड में बीएयू में डीन के पद पर चुना गया। 2010 में फिर से नौणी यूनिवर्सिटी में सेवाएं दी। वह 20 से अधिक देशों में शोध कार्य कर चुके हैं। 15 मई को नौणी यूनिवर्सिटी के वीसी डा. एचसी शर्मा का कार्यकाल पूरा हो गया था।

उन्होंने बीएयू में वीसी पद पर रहते हुए ही डॉ. परमार यूनिवर्सिटी नौणी के लिए आवेदन किया था। इसके बाद उनका नाम पैनल में आ गया था और अब वह नौणी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बन गए हैं। डॉ. कौशल नौणी यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर पहुंचने सोलन जिला के पहले वैज्ञानिक बने हैं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने डॉ कौशल की नियुक्ति को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है।

डॉ. परविंद्र कौशल 17 फरवरी 2017 से अब तक झारखंड की बिरसा मुंडा कृषि विश्वविद्यालय रांची के वाइस चांसलर रहे, वहां भी अभी डॉ. कौशल का 6 माह का कार्यकाल बचा था। इससे पहले डॉ. कौशल नौणी विवि स्थित राष्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिक विकास बोर्ड के निदेशक पद पर सेवाएं चुके हैं।

किसानों में भरोसा पैदा करे नौणी विवि : गवर्नर

  • नए कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल से बोले राज्यपाल आचार्य देवव्रत
  • हिमाचल को प्राकृतिक खेती में राष्ट्र का अग्रणी राज्य बनाया जाए

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के नवनियुक्त कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल से कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती के प्रसार और प्रचार के लिए समर्पित वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीम तैयार करें, ताकि प्राकृतिक खेती को सुनियोजित और वैज्ञानिक ढंग से किसानों में लोकप्रिय बनाया जा सके।

राज्यपाल ने कुलपति से कहा कि प्राकृतिक खेती में ऐसे कार्यों की आवश्यकता है, जिससे किसान और बागवान इस पद्धति पर भरोसा करें। इसके लिए संपूर्ण वैज्ञानिक समुदाय तथा विद्यार्थियों को प्रेरित करना होगा, ताकि प्राकृतिक खेती का लाभ प्रत्येक किसान तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती लंबे समय तक मनुष्य के स्वास्थ्य, प्राकृतिक स्त्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य के विभिन्न स्थानों पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र प्राकृतिक खेती के लिए मॉडल केंद्र बनाए जाएं, ताकि आसपास के किसान मौके पर जाकर प्राकृतिक खेती देख सकें और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों के प्रश्नों और शंकाओं का वैज्ञानिकों, कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारी द्वारा निचले स्तर पर ही समाधान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बागवानी विश्वविद्यालय से प्राकृतिक खेती के संबंध में किसानों और बागवानों को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन निरंतर मिलता रहना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि किसानों की आय दोगुना करने का प्राकृतिक खेती ही सबसे अच्छा विकल्प है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए बजट का प्रावधान किए जाने से पूरे देश में प्राकृतिक खेती लोकप्रिय होगी और किसानों के लिए खुशहाली लाएगी।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को किसानों में व्यापक तौर पर अपनाए जाने के लिए आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा प्रगतिशील किसानों को इससे जोड़ा जाए। पढ़े-लिखे युवा सही मार्गदर्शन के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ाने में और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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