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प्रकृति के अध्ययन को बनाया है पर्यावरण चेतना केंद्र

सोमी प्रकाश भुव्वेटा। चंबा
अपने और अपने परिवार के लिए तो हर कोई कुछ न कुछ करता है। पर बेहद कम लोग होते हैं, जो सिर्फ समाज के लिए जीते हैं। जडेरा के रतन चंद भी उन्हीं में से एक हैं, जो सिर्फ समाज के लिए जी रहे हैं। इस इंसान को पर्यावरण के साथ छेड़छाड़़ बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं।
प्रकृति के साथ इनके जुड़ाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दशक पहले जिस एरिया में भूस्खलन होना शुरू हुआ है।

उस एरिया के धंसने की संभावना पहले ही प्रशासन के समक्ष इन्होंने जता दी थी, पर प्रशासन ने उस वक्त रतन चंद की इस भूस्खलन की संभावना को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और जब भूस्खलन शुरू हुआ, तो जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए। साहो में शुरू हुए उस भूस्खलन की वजह से सैकड़ों लोगों की जमीनों को काफी नुकसान हुआ है।

इनसे आज तक लोग उबर नहीं पाए हैं। वैसे यहां स्पष्ट कर दें कि रतन महज 11 साल की उम्र में प्रकृति के प्रति आकर्षित हुए थे और आज भी इनका पहला प्यार प्रकृति ही है। रतन चंद ने पर्यावरण का बारीकी से अध्ययन करने को साहो में चेतना केंद्र बनवा रखा है। इस चेतना केंद्र की सबसे बड़ी खासियत तो यही है कि यहां पर हर साल काफी तादाद में देश-विदेश के स्टूडेंट्स शोध के लिए पहुंच रहेे हैं। इन्हें पुस्तकों से भी काफी लगाव है। इसीलिए इन्होंने एक किताबों की दुकान भी खोल रखी है।

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