ravitanya literature

महज 17 साल की उम्र में रवितनया ने लिख डाली 420 पेजों की अंगे्रजी किताब

देवेंद्र गुप्ता। मंडी
हिमाचल की प्रख्यात लेखिका और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कंचन शर्मा और विश्वविद्यालय शिमला के मैनेजमेंट गुरु कहे जाने वाले पिता प्रो. प्रमोद शर्मा की बेटी रवितनया भी अब साहित्य जगत की हस्ताक्षर बन गई है। माता-पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए इनकी बेटी ने महज 17 साल की उम्र में 420 पेजों की एक किताब लिख डाली।

किताब पूरी तरह से अंग्रेजी में लिखी गई है। इस किताब के लेखन से लेकर, संपादन और कवर पेज तक खुद ही बना डाला। दिल्ली के एक पब्लिकेशन हाउस ने उस किताब को छाप भी दिया। मजे की बात अब कुछ दिन पहले ही यह किताब दिल्ली के एक साहित्यक मेले में भी चर्चा का विषय रही है। लाइफ इज ब्यूटीफुल नाम से लिखी यह किताब जितनी प्रगाढ़ता से लिखी गई है । उसे पढ़कर लेखिका रवितनया की उम्र के हिसाब से लेखन शैली हैरान कर जाती है। 17 साल की उम्र में जब बच्चे अपनी जद्दोजहद में होते हैं। उस उम्र में रवितनया ने अपने जिंदगी के 15 साल के हर पल को समेट दिया।

इस किताब में एक लड़की के तौर गुजारे जिंदगी के 15 साल के अनुभवों का ताना बाना बुना है

420 पेज की इस किताब को लिखने में महज दो साल लगे। मगर इस किताब को लिखकर उसने आज अपने को प्रदेश की सबसे युवा लेखिका की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया है। इस किताब में एक लड़की के तौर गुजारे जिंदगी के 15 साल के अनुभवों का ताना बाना बुना है। इस किताब के कई चैप्टर, तो जिंदगी की बड़ी-बड़ी बातों को बखूबी समेट जाते हैं। यह किताब उन अभिभावकों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो अक्सर जवान बेटी को लेकर असमंजसता के दौर में जीते हैं।

अपनी किताब के बारे में बताते हुए रवितनया ने कहा कि इस किताब को लिखने में बेशक सोच उनकी रही हो पर उनके माता-पिता ने हमेशा प्रेरणा के स्रोत बनकर इसे लिखने में कामयाबी दिलवाई है। उन्होंने बताया कि लिखने की राह तो छह साल की उम्र में ही पकड़ ली। इसके बाद नौ साल की उम्र में पेंटिंग्स भी की। रवितनया विश्व प्रसिद्ध रोरिक आर्ट गैलरी की सबसे छोटी उम्र की चित्रकार हैं।

इनके बनाए हुए ग्रिटिंग कार्ड आज भी आर्ट गैलरी में मिलते हैं। इस किताब की चर्चा दिल्ली के पुस्तक मेले में भी हुई। रवितनया मंडी जिला के पुरानी मंडी के एक परिवार की नाती है। प्रदेश के सांस्कृतिक केंद्र मंडी के साहित्यकारों ने भी अपनी इस उभरती लेखिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। मंडी के सहित्यकार प्रो. डीएन कपूर ने कहा कि बेशक वह मां जैसी है मगर उसका व्यक्तिव मां से भी बढ़कर है।

माता-पिता की राह पर

रवितनया के पिता भी प्रदेश विश्वविद्यालय में मैनेजमेंट के प्रोफेसर हैं। प्रो. प्रमोद शर्मा ने दस किताबें लिखी हैं। वे साहित्य जगत और मैनेजमेंट लेखन के लिए जाने जाते हैं, जबकि माता कंचन शर्मा को उनकी किताब भारत एक विमर्श को राष्ट्रपति सम्मान मिल चुका है। देश-विदेश के साहित्य जगत में एक हस्ताक्षर हैं। इन्हीं की प्रेरणा से रवितनया को 17 साल की उम्र में किताब लिखने की दिशा मिली।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams