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मुख्य सचिव दो हफ्ते में बताएंगे पार्किंग के बारे में

IGMC के स्टाफ की गाडिय़ों की लिस्ट मांगी

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC में पार्किंग की समस्या को लेकर दायर याचिका में मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह 2 सप्ताह के भीतर यह बताएं कि आईजीएमसी के पास पर्याप्त पार्किंग स्थान मुहैया करवाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य सचिव को यह भी बताना होगा कि आईजीएमसी में तैनात डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के पास कितनी गाडिय़ां हैं, जिन्हें आईजीएमसी परिसर के आसपास खड़ा किया जाता है।

कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह भी पूछा है कि कितने समय के भीतर IGMC के नजदीक अम्रुत मिशन के तहत पार्किंग का निर्माण कर लिया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य सचिव मांगी डिटेल देने में असमर्थ रहे तो अगली सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में उपस्थित रहना होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेश चंदेल द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद ये आदेश

पारित किए। याचिकाकर्ता के अनुसार IGMC अस्पताल के पास मरीजों व तीमारदारों सहित स्टाफ के लिए भी पर्याप्त पार्किंग स्थल नहीं है, जिस कारण यहां सभी जरूरतमंद लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

किसी सरकार को नहीं दिखी मरीजों की परेशानी

हाईकोर्ट ने भी माना कि IGMC में तीमारदारों को पहले तो मरीज को गेट पर गाड़ी से उतारना पड़ता है, फिर पार्किंग की तलाश में भटकना पड़ता है। पार्किंग मिले भी तो कभी पुलिस चालान कर देती है या गाड़ी उठा ले जाती है। कोर्ट ने खेद जताया कि आईजीएमसी के विस्तार के लिए भारी खर्चा किया जा रहा है, लेकिन पार्किंग तक संबंधित अधिकारियों की सोच ही नहीं पहुंच पा रही। कोर्ट ने सरकारों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले 4 दशकों से किसी भी सरकार ने आईजीएमसी के पास पार्किंग की समस्या से निजात दिलाने की नहीं सोची।

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