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Litchi

बागवान व दुकानदार परेशान, मार्कीट में मंदी

अभिनव कौशल। हमीरपुर

बिहार में चमकी बुखार और लीची को लेकर फैले भ्रम को लेकर हिमाचल में भी लीची की बिक्री प्रभावित होने लगी है। दुकानदारों के पास रखी लीची अब सूखने लगी है। लोग चमकी बुखार के डर से लीची खरीदने में परहेज करने लगे है। उधर बागवान भी लीची के पौधे खरीदने पर हिचकिचाने लगे है। लीची की बिक्री में आई मंदी से उन बागवानों की हवाईयां उडऩे लगी हैं जिन्होंने व्यापक स्तर पर लीची के बाग लगाए हैं।

डॉक्टरों के साथ बिहार सरकार के कुछ अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की मौत के पीछे उनका लीची खाना भी एक कारण है। बताया ये जा रहा है कि बच्चे कुपोषण के शिकार थे और वे भूखे पेट अकसर लीची ही खाया करते थे, जिससे उनके शरीर पर गलत प्रभाव पडऩे से बीमार होने लगे। इसका असर यह हुआ है कि बिहार समेत देश भर में लीची को संदिग्ध नजर से देखा जा रहा है। हालात ये हो गए हैं कि लोगों ने लीची खरीदना तक बंद कर दिया है।

इस वजह से दुकानदारों को खऱीददार नहीं मिल रहे हैं और इस फल के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि बीते एक हफ्ते में हमीरपुर , कांगड़ा, मंडी, ऊना सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में लीची की बिक्री में करीब 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। माना जाता है कि लीची का सीजऩ केवल 20 से 25 दिन का होता है। इसके बाद लीची खऱाब होना शुरू हो जाती है। इस बार लीची की फ़सल होने से बागवानों को अच्छा मुनाफ़ा होने की उम्मीद थी, लेकिन चमकी बुखार के कारणों में लीची को लेकर फैली अफ़वाह ने बागवानों और फल विक्रेताओं की परेशानी बढ़ा दी है। फलों की दुकानों में लीची तो है, लेकिन खऱीददार नहीं मिल रहे हैं।

लीची नहीं, कुपोषण जिम्मेदार

इस बारे में बाग़वानी विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर पवन ठाकुर ने बताया कि जिन क्षेत्रों में कोहरा नहीं पड़ता और पानी की सुविधा है, वहां लीची की खेती को बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने माना कि लीची को लेकर उठे भ्रम को लेकर बागवानों को मंदी के दौर से गुजऱना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लीची खाने से नहीं अलबता कुपोषण की वजह से बिहार में बच्चे बीमार हुए है।

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