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103 सालों से नहीं मनाई गई दीवाली

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। हमीरपुर
देशभर में बुधवार को दीपावली का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। शहरों व गांवों में लोग अमावस्या के अंधेरे को मिटाने के लिए घरों में दिए जलाएगे। वही जिला हमीरपुर का एक ऐसा गांव भी है जिसने की 103 सालों से घरों में दीए नहीं जलाए है। आज भी गांव के लोग दीपावली के पर्व को नहीं मनाते है।

जिला हमीरपुर के गांव सम्मू को 103 सालों से एक ऐसा श्राप लगा है जिसका निवारण आज तक नहीं हो सका। इस गांव में इस श्राप की इतना खौफ है कि दीपावली को गांव के लोग घरों से बाहर भी निकलना मुनासिव नहीं समझते । इसे संयोग कहे या श्राप की दीपावली के महीने में इस गांव में किसी न किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

ये है कारण…..एक श्राप जिसके चलते इस गांव में नहीं मनाया जाता दीपावली का त्यौहार…….

ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में करीब 103 वर्षो से दीपावली का त्यौहार नहीं मनाया गया है। अगर कोई परिवार दीपावली के त्यौहार को मनाने की कोशिश करता है तो गांव में कोई न कोई अकाल मृत्यु हो जाती है। यह गांव एक ऐसा श्राप भुगत रहा है। जो पिछले सौ सालों से इस गांव का पीछा नहीं छोड़ रहा। दरअसल दीपावली के ही दिन गांव की ही एक महिला अपने पति के साथ सती हो गई थी महिला दीपावली का त्यौहार मनाने के लिए अपने मायके जाने को निकली थी। उसके पति भारतीय सेना में जवान थे।

किसी लेकिन जैसे ही महिला गांव से कुछ दूर आ गई तो सामने से उसके पति के शव को ग्रामीण ला रहे थे। उसके पति की मृत्यु डयूटी के दौरान हो गई थी। महिला गर्भवती भी थी। कहते है कि महिला को यह सदमा बर्दाशत नहीं हुआ और वह अपने पति के साथ ही सती हो गई। जाते जाते वह सारे गांव को यह श्राप देकर चली गई कि इस गांव के लोग कभी भी दीपावली का त्यौहार नहीं मना पाएगे। और उस दिन से आज तक इस गांव में किसी के घर में दीए नहीं जले।

आज की गांव के लोगों को दीपावली न मनाने का मलाल….

धीरे-धीरे वक्त बीतता चला गया सौ साल बीत गये। लेकिन परंपरा नहीं बदली। दीपावली का त्यौहार और सजने-संवरने का मलाल भी इस गांव के लोगों की जुबान पर साफ झलकता दिखाई दिया। गांव के ही संजय रागड़ा ने बताया कि जब भी यह त्योहार आता है तो उनका दिल भर आता है। क्योंकि सभी जगह घरों में चहल-पहल होती है। लेकिन उनके गांव में इस दिन किसी के घर में दीए नहीं जलते।

टूने टोटके से लेकर हवन यज्ञ तक सब रहा विफल…

गांव को इस श्राप से मुक्त करवाने के लिए कई बार टूने टोटके से लेकर हवन यज्ञ तक का सहारा लिया गया। लेकिन सब कुछ विफल रहा। करीब 3 साल पहले गांव में एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन भी किया गया था। लेकिन आज दिन तक इस गांव को इस श्राप से मुक्ति नहीं मिल पाई।

पंचायत प्रधान गरीब दास ने बताया कि सम्मू गांव में आज दिन तक दीपावली का त्यौहार नहीं मनाया गया है। उन्होंने बताया कि दीपावली का त्यौहार आते ही गांव में कोई न कोई मृत्यु हो जाती है। उन्होंने बताया कि पता नहीं इस गांव को इस श्राप से मुक्ति अब मिलेंगी।

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