sandalwood smuggling

ज्वालामुखी में नहीं थम रहा है चंदन तस्करी का सिलसिला

देशराज भाटिया। ज्वालामुखी 

ज्वालामुखी में चंदन के पेड़ लगभग 30 हेक्टेयर में सरकारी तथा निजी भूमि में सैकड़ों के हिसाब से उगे हैं। लेकिन वन विभाग के पास इनके आंकड़े तक उपलब्ध नहीं हैं। उधर, चंदन तस्करी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। अगर चंदन तस्करी इसी तरह जारी रहीं, तो वो दिन दूर नहीं, जब ज्वालामुखी के नक्शे से चंदन के पेड़ गायब हो जाएंगे।

हालांकि वन विभाग ने पुलिस के सहयोग से दो चंदन तस्करों को पकड़ कर सजा भी दिलवाई है। सूत्रों के अनुसार चंदन की लकड़ी की कीमत 300 रुपये प्रति किलो है। एक पेड़ का भार लगभग 60 किलो के करीब होता है, जिसकी कीमत मार्केट में 18000 रुपये तक हो जाती है। तस्कर चंदन के पेड़ तस्करी कर उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देते हैं। चंदन की भारी मांग को देखते हुए तस्करों को मुंह मांगी कीमत मिल जाती है। इन पेड़ों को यौवनावस्था में पहुंचने से पहले ही काट दिया जाता है, लेकिन प्रशासन तस्करों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाता है।

यही कारण है कि इस गिरोह के हौसले और भी बुलंद हो रहे हैं। वन विभाग की नींद भी जब खुलती है, जब तस्करों ने चंदन के पेड़ों पर हाथ साफ कर दिया होता है। वन विभाग से क्षेत्र में लगे चंदन के पेड़ों की जानकारी लेनी चाही तो वन विभाग के पास इसके आंकड़े तक उपलब्ध नहीं थे कि क्षेत्र में चंदन के कितने पेड़ हैं।

चंदन तस्करों के खिलाफ कई मामले अदालत में विचाराधीन

बता दें कि तस्करों ने ज्वालामुखी क्षेत्र में सरकारी तथा निजी भूमि से अब तक सैंकड़ों चंदन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर सफाया कर दिया है। वहीं, ज्वालामुखी के वन परिक्षेत्राधिकारी प्रेम लाल का कहना है कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। अत: उन्हें ज्वालामुखी में चंदन के कितने पेड़ हैं, उनके आंकडों  की पूरी जानकारी नहीं है।

देहरा उपमंडल वन अधिकारी हरीश मनकोटिया का कहना है कि जल्द ही ज्वालामुखी में चंदन के पेड़ों की संख्या बारे जानकारी ली जाएगी। वन विभाग चंदन की तस्करी पर कड़ी निगरानी रख रहा है और चंदन तस्करों के खिलाफ कई मामले अदालत में विचाराधीन हैं। कुछ मामलों में तस्करों को वन विभाग सजा भी दिला चुका है। चंदन तस्करी पर वन विभाग पूरी तरह से रोक लगाने में सफल हुआ है।

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