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सरसा नदी में उद्योगों का कैमिकल मिलने से पानी बन रहा जहर

ओम शर्मा/धर्मपाल। केंदूवाल
कभी शिवालिक की पहाडिय़ों के बीचोंंबीच कल-कल बहती व अठखेलियां करती सरसा नदी का नीला पानी किसानों के लिए अमृत था। वर्ष 2002 से पहले सरसा इस क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी थी, जिसका पानी लोगों, किसानों और पशु पक्षियों से कम अमृत के सामान था आज वहीं सरसा को देखने से भी लोग डरते हैं। कई जंगली जानवर व किसानों के पशु आज सरसा में घुले जहर से काल का ग्रास बन गए।sarsa river

वर्ष 2002 में हिमाचल को मिला विशेष औद्योगिक पैकेज जहां उन्नति और विकास लेकर आया, वहीं यह औद्योगिक क्रांति क्षेत्र की जीवनदायिनी सरसा, बीबीएन की जमीन और हवा पानी में जहर बनकर घुल रही है। एक तरफ जहां बारिश की आड़ में उद्योगों द्वारा सरसा में जहर घोला जाता रहा है वहीं करोड़ों के कॉमन इंफूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) ने सरसा पर कालिख पोत दी।

क्षेत्र को गंदे पानी से बचाने के लिए 65 करोड़ की लागत से बद्दी के केंदूवाला में स्थित सीईटीपी प्लांट ने सरसा में कालिख घोल दी। सीईटीपी द्वारा क्षेत्र के उद्योगों से निकलने वाले कैमिकल युक्त पानी को ट्रीटमेंट करने का दावा किया जाता है। इतना ही नहीं सीईटीपी प्लांट से ट्रीट हुए पानी को सरसा में छोड़ जा रहा है।

इससे सरसा का नीला पानी काला हो चुका है। सीईटीपी प्लांट द्वारा सरसा में छोड़े जाने वाले पानी के कारण काले पानी के साथ-साथ कैमिकल की झाग भी सरसा को बदनुमा कर रही है। लोगों का आरोप है कि ट्रीटमेंट प्लांट मात्र दिखावा है और करोड़ों रुपये की वसूली पानी को साफ करने के नाम पर उद्योगों से की जा रही है।

नदी पर किसान व पशु-पक्षी निर्भर

लोगों, पशु पक्षियों और जानवरों के साथ-साथ क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए सरसा का पानी अमृत था। सरसा के नीले पानी से जहां किसानों की फसलें लहराती थीं, वहीं लोगों व पशु-पक्षियों के साथ साथ जंगली जानवरों के लिए सरसा वरदान थी। आज हालात यह हो चुके हैं कि उसी सरसा का पानी कई किसानों के पशुओं की जान ले चुका है।sarsa river1

केंदूवाला के सीईटीपी प्लांट से सरसा में छोड़ा जाने वाला पानी पूरी तरह से साफ है। प्लांट से छोड़े जाने वाले पानी का रंग देखने में बेशक थोड़ा काला है, लेकिन उसके कोई भी हानिकारक कैमिकल नहीं। अगर क्षेत्रवासियों को किसी भी प्रकार का भ्रम है तो लोग कभी भी प्लांट में आकर सारी कार्यप्रणाली को स्वंय देख सकते हैं। -अशोक शर्मा, सीईओ, सीईटीपी केंदूवाल

मलपुर के लोगों की शिकायत आने के बाद प्रदूषण विभाग ने कई जगहों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। प्लांट से छोड़ा जाने वाला पानी देखने में तो काला है, लेकिन जब पानी को हाथ में लिया जाता है तो साफ नजर आता है। फिर भी ग्रामीणों की शिकायत के बाद विभाग ने पानी की सैंपलिंग कर जांच शुरू कर दी है। अगर पानी में हानिकारण कैमिकल या कुछ भी समस्या पाई जाती है तो उसे सरसा में छोडऩे से रोक दिया जाएगा। -बृज भूषण, एक्सईन, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड बद्दी

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