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बिलासपुर में हुआ था खैर का अवैध कटान, विधायक पर लगे थे आरोप

अब करोड़ों की लकड़ी का सीजर मैमो और रेंज अफसर की रिपोर्ट गायब

राजेश मंढोत्रा। शिमला
बिलासपुर जिला के पंजगाईं के जंगलों से पूर्व कांग्रेस सरकार के समय हुए अवैध कटान के मामले में वन विभाग ने ही चार्जशीट को बदल दिया, ताकि वन माफिया और प्रभावी राजनेता को बचाया जा सके। 14 मार्च, 2016 को पंजगाईं और बराथू के जंगलों में 2 करोड़ रुपये से भी ज्यादा मूल्य की खैर की लकड़ी का अवैध कटान सामने आया था। इसमें कांग्रेस के एक विधायक पर आरोप लगे थे। अब इस केस की चार्जशीट से करोड़ों की लकड़ी का सीजर मैमो और उस समय जमा करवाई गई रेंज अफसर की रिपोर्ट गायब कर दी गई है।

ये इसलिए किया गया ताकि आरोपी वन माफिया और मिलीभगत में शामिल वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जीरो लॉस थ्यूरी के बहाने बचाया जा सके। जबकि रिकॉर्ड से हटाए गए सीजर मैमो में करीब सवा करोड़ की लकड़ी गायब होने का जिक्र था। मामला तब खुला जब पिछले महीने इसी केस में गवाही के लिए तत्कालीन डीएफओ को बुलाया गया। चार्जशीट के दस्तावेजों से हुई छेड़छाड़ को देखने के बाद डीएफओ ने विभागीय जांच के केस में गवाही देने से इनकार कर दिया।

मीडिया के दबाव में 4 फॉरेस्ट गार्ड सस्पेंड किए

अब केस वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने रखा जा रहा है। इस केस में नेताओं और माफिया का प्रभाव इतना था कि लकड़ी जब्त करने वाले डीएफओ को चल रही जांच के बीच बदल दिया गया। बाद में जब करोड़ों की लकड़ी गायब हुई, तो वन विभाग ने एफआईआर तक नहीं करवाई। मीडिया के दबाव में 4 फॉरेस्ट गार्ड सस्पेंड किए, जबकि मुख्य रूप से जिम्मेदार ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर यानी डिप्टी रेंजर पंजगाईं को सस्पेंड करने से पहले ही रेंज अफसर सदर बना दिया, जिसमें पंजगाईं ब्लॉक भी आता है।

जबकि केस की जांच कर रहे रेंज अफसर को इससे हटा दिया गया। माना जा रहा है कि नियमों के विपरीत ये नियुक्ति इसलिए की गई ताकि रिकॉर्ड से छेडख़ानी की जा सके। वर्तमान में ये अधिकारी बिलासपुर डिविजन के तहत ही झंडूता में हैं। ये भी ट्रांसफर नियमों के खिलाफ है, क्योंकि इनकी चार्जशीट भी इसी डिविजन में है। इसी संदिग्ध अफसर को टैरिटोरियल पोस्ट दी गई है, जो हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।

डेढ़ करोड़ की जब्त लकड़ी बेच गया था माफिया

14 मार्च, 2016 में डीएफओ ने पंजगाईं और बराथू से 2 करोड़ से ज्यादा की लकड़ी जब्त की। वन विभाग ने बराथू की लकड़ी को रेंज आफिस बिलासपुर लाकर नीलाम किया, जबकि पंजगाईं की लकड़ी को आदेशों के बावजूद बिलासपुर नहीं लाया गया। 25 मई, 2016 को पता चला कि पंजगाईं में करोड़ों की लकड़ी गायब है। इसे वन विभाग के फील्ड अफसरों से मिलकर माफिया बेच गया।

भाजपा सरकार ने अब तक नहीं की कोई कार्रवाई

भाजपा नेता सुरेश चंदेेल इस मामले में जांच के लिए कोर्ट जा चुके हैं। कांग्रेस सरकार के समय कोर्ट में वन विभाग ने झूठा जवाब दिया कि इसमें कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई। तब कांग्रेस नेता रामलाल ठाकुर ने इस केस में प्रेस वार्ता कर अपनी ही सरकार पर सवाल उठा दिए थे। भाजपा नेता रणधीर शर्मा ये मामला विधानसभा में उठा चुके हैं, लेकिन अब तक नई भाजपा सरकार इस मसले पर चुप है।

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