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Semester system will not apply in the state

भौगोलिक स्थिति और इंफ्रास्ट्रक्चर का तर्क दिया प्रधानाचार्यों ने

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला : नई शिक्षा नीति के प्रारूप के बावजूद हिमाचल के स्कूल और कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम लागू नहीं होगा। राज्य सरकार इसके पक्ष में नहीं है। इस पर तर्क दिया जा रहा है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां और इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए इसे लागू करना संभव नहीं है।

राज्य हायर एजुकेशन काउंसिल की ओर से शिमला में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान शिक्षाविदों ने ये तर्क दिया। अब काउंसिल इसका प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी। सरकार के माध्यम से यह प्रस्ताव मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा। कार्यशाला में भाग लेने आए कॉलेज प्रिंसिपलों ने कहा कि 2014 में रूसा लागू होने के बाद कॉलेजों में समेस्टर सिस्टम लागू किया गया था। 4 साल यानि 2018 तक इसे सही तरह से लागू ही नहीं किया जा सका।

हायर एजुकेशन काउंसिल के चेयरमैन प्रो. सुनील गुप्ता ने कहा कि दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में शिक्षा नीति में क्या बदलाव शिक्षाविद चाहते हैं? उस पर सुझाव लिए जाएंगे। शनिवार को ओपन हाउस सेशन भी करवाया जाएगा। इसका पूरा खाका तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा।

हिमाचल शिक्षा को रोजगार से जोड़ेगा : भारद्वाज

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोडऩा अनिवार्य है और शिक्षा को रोजगार परक बनाना जरूरी है। वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में नई योजनाएं भी शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वशाला शिक्षा के स्तर में व्यापक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शिक्षा के स्तर में समावेशी विकास संभव हो सके। उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा में गुणवत्ता और उसके रोजगार परक बनाने के लिए विशेष मुहिम चलाई जा रही है।

मातृभाषा में हो 8वीं तक की शिक्षा : प्रो. नागेश

यूजीसी सदस्य और एचपीयू के प्रो. नागेश ठाकुर ने कहा कि पहली से 8वीं तक की शिक्षा मातृ भाषा में होनी चाहिए। इससे छात्रों को संस्कार युक्त शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में रिसर्च यूनिवर्सिटी, टीचिंग यूनिवर्सिटी और कॉलेज का प्रारूप कहा गया है। इससे शिक्षा में बड़े बदलाव होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के गठन का जो फैंसला लिया है वह सराहनीय है। वहीं, कलस्टर यूनिवर्सिटी मंडी के वीसी प्रो. सीएल चंदन ने कहा कि प्राइमरी एजुकेशन में सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्राइमरी में अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड स्टडी सिस्टम को लागू किया जाना चाहिए।

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