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shaukat ali

रोजाना 60 किलोमीटर दौडऩे वाले शौकत अली को मिलता था ताना

जेवलिन थ्रो में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांज मेडल किया था हासिल

सोमी प्रकाश भुव्वेटा। चंबा
जिंदगी में अगर कुछ हासिल करना है तो उसके लिए इरादे मजबूत और बस मेहनत करिये। लोग आपके बारे क्या कहते और सोचते हैं कि आप उन पर ज्यादा ध्यान मत दीजिए। अगर ध्यान देंगे तो फिर उनकी ही बातों को मन से लगाकर उनमें उलझे रहेंगे। अब मुझे ही ले लीजिए मुझे कई लोगों ने कहा कि आप जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते। खुद इस बात को जब अपने कानों से सुना तो बेहद बुरा भी लगा लेकिन उसे मैंने पॉजिटिव तरीके से लिया और फिर यह ठान लिया कि अब मुझे कुछ करके ही बताना है।

यह किसी आम आदमी के अनुभव की नहीं बल्कि एक ऐसे चैंपियन के अनुभव की बात है जिसने जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानी। बिजली बोर्ड से सेवानिवृत्त एक ऐसे चैंपियन का आज यहां जिक्र किया जा रहा है, जो रोजाना साठ किलोमीटर तक दौड़ते थे। रनिंग मशीन के तौर पर मशहूर शौकत अली 11 अलग-अलग खेलकूद गतिविधियों में माहिर हैं। नशे से हमेशा दूर रहने वाले शौकत अली सेवानिवृत होने के बावजूद आज भी एकदम चुस्त दुरुस्त हैं।

क्तिगत प्रयासों से समय-समय पर कैंप आयोजित करके खिलाडिय़ों को प्रशिक्षित कर चुके हैं

इनका आज इसीलिए जिक्र किया जा रहा है, क्योंकि जनाब जब भी कुछ करना चाहते थे, तो इन्हें यही कहा जाता था कि आप जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते। इसी बात को इन्होंने अपना मजबूत हथियार बनाया और जैवलिन थ्रो में राष्ट्रीय स्तर पर रिकार्ड बनाकर ब्रांज मेडल हासिल कर बता दिया कि शौकत अली एक ऐसे चैंपियन हैं, जो कभी हार नहीं मानते। लांग जंप में भी देश भर में छठे स्थान पर रह कर चंबा का नाम रोशन कर चुके हैं। इंटर स्कूल, इंटर यूनिवर्सिटी में भी चैंपियन रह चुके हैं।

स्पोट्र्स से जुड़े बच्चों की हर तरह की मदद को हमेशा तैयार रहते हैं। अपने व्यक्तिगत प्रयासों से समय-समय पर कैंप आयोजित करके खिलाडिय़ों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। रनिंग मशीन के तौर पर पहचान बनाने वाले इस चैंपियन में कितना दम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार जवाहर नवोदय विद्यालय सरोल में इनकी देखरेख में एक माह का कैंप लगा था।

इस कैंप का हिस्सा बने खिलाडिय़ों ने टूर्नामेंट में सभी स्पोट्र्स एक्टीविटीज में अन्य स्कूल के खिलाडिय़ों को पछाड़ दिया था। शौकत अली को इस बात का दुख है कि स्पोट्र्स मैन की कोई कदर नही करता। सरकार भी खिलाडिय़ों को ज्यादा तवज्जों नहीं देती। इसलिए खिलाडिय़ों को शौकल अली एक ही मश्वरा देते हैं कि पढ़ाई कभी न छोड़ें, क्योंकि बिना पढ़ाई के स्पोट्र्स पर्सन की पहचान भी गौण रहती है।

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