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Sheep Palanquin Bada Bhangal

पधर के गरलोग गांव का रहने वाला था भेड़पालक राकेश कुमार

हिमाचल दस्तक, ललित ठाकुर। पधर

बीते वर्ष सायर उत्सव के बाद भेड़पालक राकेश कुमार चंबा के मुराला जोत में अपनी भेड बकरियों के साथ भारी बर्फबारी और ग्लेशियर के टूटने से मौत के आगोश में समा जाने के बाद अब एक साल बाद सायर उत्सव शुरु होने से दो दिन पहले उसका शव छीन-भिन्न अवस्था मे बरामद हुआ है। पधर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुन्नू के गांव गरलोग निवासी भेड़ पालक राकेश कुमार उर्फ राकू का शव एक वर्ष के उपरांत बड़ा भंगाल क्षेत्र के मुराला जोत से बरामद हुआ है। मृत भेड़पालक का शव मिलने की सूचना मिलते ही परिजन और पुलिस रविवार सुबह मुराला जोत को रवाना हो गए हैं। परिजनों के सोमवार सांय तक मुराला जोत पहुंचने की सूचना है।

मृतक भेड़पालक के परिवार के सदस्य बरोट क्षेत्र के सरमाणी गांव में रहते हैं। मुराला जोत में मौजूद भेड़पालकों ने राकेश का शव मिलने की सूचना पहाड़ी में मोबाइल संपर्क न होने के बावजूद पैदल चलकर सरमाणी गांव तक पहुंचाई। गत वर्ष 22 सितंबर की रात को भेड़पालक राकेश कुमार 26 पुत्र सिद्धू राम अपनी भेड़ बकरियों के साथ मुराला जोत को क्रास कर रहा था। उसके साथ साथी भेड़पालक इंद्रपाल भेड़ बकरियों के साथ पीछे चल रहा था, जबकि राकेश आगे था। पहाड़ी पर भारी मात्रा में हिमपात होने और गलेशियर गिरने से राकेश कुमार वहीं फंस गया। दोनों भेड़ पालकों की भेड़ बकरियां गलेशियर में दब कर मर गई। साथी भेड़पालक इंद्रपाल ने पीछे की ओर हट कर बड़ा भंगाल क्षेत्र पहुंचकर अपनी जान बचाई। जिसके बाद में रेस्कयु कर चंबा जिला के क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

Sheep Palanquin Bada Bhangal

परिजनों में मृतक के भाई मनसा राम, रूप लाल और कुशाल चंद शव मिलने की सूचना मिलते ही रविवार को मुराला जोत रवाना हो गए हैं। हालांकि उस वक्त भी सरकार व द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर ने भेड़पालक राकेश कुमार ढूंढने के विभिन्न प्रयास किए थे, लेकिन मौसम के बार-बार खराब होने से रेस्क्यू नही हो पाया था। वही मनाली के एक दल ने भी मुराला जोत में पहुंच कर ढूंढने का प्रयास किया था लेकिन उस दल को भी मायूसी हाथ लगी थी। सरमाणी गांव से उनके कुछ रिश्तेदार साथ में मुराला जोत को रवाना हुए हैं। राकेश का शव मिलने की सूचना परिजनों ने मुलथान पुलिस चौकी को दे दी है। पुलिस प्रशासन द्वारा एसडीएम बैजनाथ को भी सूचना दे दी गई है।

परिजन मुराला जोत में ही अंतिम संस्कार के पक्षधर

राकेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए नीचे के क्षेत्र लाया जा रहा है या वहीं पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा, मुराला जोत में संपर्क न होने के कारण इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है। मृतक के परिजन मुराला जोत में ही शव का अंतिम संस्कार करने के पक्षधर थे। मृतक के पिता सिद्धू राम जो इन दिनों बरोट क्षेत्र में भेड़ बकरियां चराने गए हैं उन्होंने भी अपने तीनों बेटों को राकेश के शव का अंतिम संस्कार मुराला जोत में ही करने की अनुमति दी है। वहीं एसडीएम बैजनाथ छबि नांटा ने बताया कि राकेश का शव मुराला जोत से बरामद हुआ है। शव को जंगली जानवरों ने खा दिया है। परिजनों ने कपड़ों से राकेश के शव की पुष्टि की है। पुलिस के मौका पर जाकर कार्यवाही की है। मुराला जोत से शव को निकालना असंभव था। परिजनों की सहमति से शव को वहीं जला दिया गया है।

बताया जा रहा है कि मृतक के शव को मुराला जोत की पहाड़ी से बाहर निकालना असंभव है। बर्फ के कारण संपर्क रास्ता टूट चुका है। मुराला जोत गए लोगों के वापिस लौटने पर पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। बता दें कि बीते वर्ष सायर उत्सव के बाद यह हादसा हुआ था और एक वर्ष के बाद सायर उत्सव के दौरान ही भेड़पालक राकेश का शव बरामद हुआ है।

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