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सैकड़ों हारियान व कारकून बनेंगे ऐतिहासिक क्षण के गवाह

सैकड़ों हारियानों के लाव लश्कर के साथ रवाना हुए देवता

हिमाचल दस्तक। बंजार
बंजार उपमंडल की जिभी घाटी की दो खाड़ागाढ़ व तिलोकपुर कोठियों के अधिष्ठाता देवता गढ़पति मूल शेषनाग के नए देवरथ की प्राण प्रतिष्ठा के बाद दर्जनों वाद्य यंत्रों की कलरव ध्वनि व सैकड़ों हारियानों व कारकूनों के लाव लश्कर के साथ ऐतिहासिक शक्तिपीठ श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू में अर्जित शक्तियों की स्थापना करने के लिए रवाना हुए।

रविवार शाम देवता को नरहां पहुंचे। सोमवार को वे भूमियां पहुंचे जहां बाहू के अधिष्ठाता देवता लक्ष्मीनारायण के साथ उनका भव्य देवमिलन हुआ। बुधवार को लक्ष्मीनारायण द्वारा उनकी मेजबानी करने के बाद बुधवार को वे बाहू पहुंचे। आज सुबह बीरवार को वे लक्ष्मीनारायण के साथ बाहू के ऐतिहासिक शक्तिपीठ श्रीजोगणी माता मंदिर में अर्जित शक्तियों की स्थापना करेंगे। इसके बाद बाहू में जनकल्याण के लिए शेषनाग एक विशाल प्रीतिभोज का आयोजन करेंगे।

44 वर्ष बाद उनके नए देवरथ का निर्माण कार्य 6 दिसंबर से आरंभ किया

गौरतलब है कि शेषनाग के नए देवरथ में इस बार ऐतिहासिक कुल्लू के राजा द्वारा शताब्दियों पूर्व भेंट किया खया चांदी का मोहरा लगाया गया है। जिसे कुछ दशकों पूर्व रथ से उतारा गया था तथा इसके स्थान पर अस्सी के दशक में सोने का मोहरा लगाया गया था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 21 दिसंबर 1973 को गढ़पति मूल शेषनाग जिभी का देवरथ बना था व इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

अब 44 वर्ष बाद उनके नए देवरथ का निर्माण कार्य 6 दिसंबर से आरंभ किया गया था व 8 दिनों में कुशल कारीगरों के द्वारा अंगाह की लकड़ी व तांबे की धातु से इसका निर्माण कार्य पूर्ण करके 14 दिसंबर को नए देवरथ का प्राण प्रतिष्ठा समारोह उनकी तपोस्थली जिभी मंदिर में आयोजित किया गया। इस प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन परंपरानुसार गढ़पति मूल शेषनाग अपने नए देवरथ पर विराजमान होकर अपने बाहू दौरे पर रवाना हुए हैं। जहां वे आज वीरवार को श्रीजोगणी माता मंदिर बाहू में अर्जित शक्तियों की स्थापना करेंगे।

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