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Shimla bypass trapped between two-lane and forelane

अभी केंद्रीय मंत्रालय से नहीं मिली प्रोजेक्ट को अपग्रेड करने की अनुमति

भानुजा ठाकुर। सोलन : कैथली घाट से शिमला तक बनने वाला 1480 करोड़ रुपये का फोरलेन प्रोजेक्ट टू लेन और फोरलेन के बीच में फंस गया है। कई माह से इस प्रोजेक्ट को अपग्रेड करने के लिए भेजी गई फाइल केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मंत्रालय में धूल फांक रही है। फोरलेन प्रोजेक्ट को स्वीकृति न मिलने की वजह से कंपनी इस कार्य को सुचारू रुप से नहीं कर पा रही है।

यदि शिमला बाईपास मार्ग का कार्य इसी गति से चलता रहा तो निर्धारित अवधि में पूरा कर पाना मुश्किल हो सकता है। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण बोर्ड ने शिमला बाईपास का निर्माण कार्य दो अप्रैल, 2018 को एक निजी कंपनी को सौंपा था। 1480 करोड़ रुपये में इस कार्य का टेंडर दिया गया था। इसी दौरान कंपनी ने एनएचएआई को सुझाव दिया कि इस मार्ग को टू लेन की जगह फोरलेन बनाया जाना चाहिए।

यदि यह प्रोजेक्ट अपग्रेड होता है तो इसका बजट करीब 700 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। एनएचएआई द्वारा रिवाइज प्रोजेक्ट रिपोर्ट केंद्रीय मंत्रालय को भेज दी थी। इसके बाद मंत्रालय की टीम ने मौके का निरीक्षण भी कर लिया था। बताया जा रहा है कि मंत्रालय की टीम ने भी शिमला बाईपास को फोरलेन बनाए जाने के लिए अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है।

तीन माह से अधिक का समय बीत चुका है अभी तक मंंत्रालय को प्रोजेक्ट को अपग्रेड किए जाने की स्वीकृति नहीं मिल पाई है।यही वजह है कि करोड़ों रुपये का शिमला बाईपास प्रोजेक्ट फोरलेन व टू लेन के बीच में फंसा हुआ है। सबसे अधिक समस्या इस मार्ग में बनने वाले पुलों के निर्माण में आ रही है। करीब 27 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में कैथलीघाट से ढली तक 13 छोटे व बड़े पुलों का निर्माण होना है। यदि प्रोजेक्ट को अपग्रेड किए जाने की स्वीकृति मिलती है तो पुलों का निर्माण फोरलेन के हिसाब से किया जाएगा। यही वजह है कि एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद एक भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया है।

हालांकि कंपनी द्वारा मार्ग की कटिंग का कार्य फोरलेन के हिसाब से ही किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस मार्ग में तीन सुरंगों का निर्माण भी किया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई टू लेन के मुताबिक ही रखी गई है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण बोर्ड के परियोजना निदेशक एसएम. स्वामी का कहना है कि शिमला बाईपास का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का अपग्रेड किए जाने के लिए केंद्र से स्वीकृति आने का इंतजार है।

अक्तूबर, 2020 में पूरा होना है बाईपास का कार्य

शिमला बाईपास का कार्य अक्तूबर 2020 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। एक वर्ष से अधिक का समय बीच चुका है, लेकिन अभी तक मात्र 20 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है। इतने कम समय में इस कार्य को पूरा कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालांकि यदि यह प्रोजेक्ट अपग्रेड होता है तो कपंनी को काम पूरा किए जाने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।

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