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अधिकतर डिपो से नहीं चली लांग रूट की बसें

एचआरटीसी का था 240 बसें चलाने का दावा

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
दिवाली पर यात्रियों की सुविधा के लिए स्पेशल बस चलाने के एचआरटीसी का दावे फेल साबित हुए हैं। इस कारण प्रदेशभर में हजारों लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामाना करना पड़ा। लोग प्राइवेट बसों व टैक्सी कर अपने घर पहुंचे। जानकारी के अनुसार राजधानी शिमला से हरिद्वार रूट पर सबसे ज्यादा बसों के लिए यात्रियों की भरमार रही। एचआरटीसी मंगलवार और बुधवार को हरिद्वार की ओर जाने वाले बसों को उपलब्ध करवाने में नाकाम रहा, जबकि ऑन डिमांड के लिए रखी गई निगम की कुछ बसें खड़ी ही रह गईं।

दिवाली पर नेपाली लोगों को हरिद्वार जाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि निगम प्रबंधन ने नेपाली लोगों के लिए 2 से 3 बसें अतिरिक्त लगाई थीं, लेकिन 6 से 7 बसों की जरूरत थी। ऐसे में निजी टैंपो टै्रवलरों में महंगा किराया देकर यात्रियों को जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एचआरटीसी न्यू बस स्टैंड सहित बाईपास से करीब 200 से अधिक टैंपो टै्रवलर हरिद्वार के लिए रवाना हुए। सूत्रों का कहना है कि जहां इस रूट पर 8 अतिरिक्त बसों की दरकार थी, वहीं पर निगम प्रबंधन ने केवल 3 अतिरिक्त बसें रवाना की। दिल्ली-चंडीगढ़ और राज्य के अन्य रूट के लिए रिजर्व रखी गई दर्जनों बसें खड़ी ही रही।

अन्य जिलों से भी नहीं चली पहली बस

राजधानी शिमला के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी लोगों को दिवाली पर पहली बस नहीं मिली। जानकारी के अनुसार बुधवार को मंडी से शिमला चलने वाली बस भी शिमला के नहीं चली। शिमला आने वाले यात्री सुबह बस का इंतजार करते रहे। जानकारी के अनुसार बस में कंडक्टर तो है, लेकिन चालक ही नहीं आया। जिसकी शिमला जाने की ड्यूटी थी। इसी तरह के मामले हमीरपुर, जाहू, धर्मपुर, मनाली में भी सामने आए। उधर एचआरटीसी प्रबंधन का कहना है कि बसों को लेकर रूट निर्धारित थे। वहीं चालकों व परिचालकों को ड्यूटी लगाई थी। प्रदेश में 240 बसें अतिरिक्त चलाई गई थी।

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