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Shindo in BPL, no government plans home address

पूजा मनकोटिया। ऊना : अनेक बार सरकारी सुविधाएं जरुरतमंद व्यक्ति के लिए पास होकर दूर बनी रहती हैं। गरीब परिवार जो जरुरतों के बोझ के तले दबा रहता है उस तक सरकारी योजनाएं पहुंचने की हिम्मत नहीं कर पाती है, क्योंकि चुनावी प्रणाली, पंचायत व अन्य साधन ऐसे जरुरतमंदों को अपनी लिस्ट में नहीं रखते हैं।

ऐसा ही एक मामला ऊना मुख्यालय से तीन किमी दूर अप्पर अरनियाला पंचायत के वार्ड नंबर 6 के शिंदो देवी व कर्मचंद का है। जिसका नाम तो बीपीएल में शामिल है, लेकिन उनके पास रहने के लिए पक्का मकान तक नहीं है। सरकारी योजनाओं के होते हुए आज दिन तक शिंदो देवी के परिवार को शौचालय निर्माण का पैसा भी नसीब नहीं हुआ है। अनेकों मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहने वाली शिंदो देवी के पास चंद इंटो से बनाया हुए सिर्फ दो कमरे हैं जो बारिश के मौसम में भी टपकते रहते हैं। अप्पर अरनियाला के वार्ड नंबर 6 में रहने वाली शिंदो देवी के पति कर्मचंद को करीब 5 साल पहले पैरालाइसिस का अटैक आया, जिससे वह चलने फिरने में असमर्थ हो गया।

इससे पहले कर्मचंद पेंटर का काम करता था, जिससे उसके परिवार का गुजर-बसर चल रहा था, लेकिन पांच साल पहले पैरालाइसिस होने के कारण घर की सारी जिम्मेवारी शिंदो देवी के सिर पर आ गई। शिंदो देवी मनरेगा व लोगों के घरों में काम कर परिवार का गुजर बसर कर रही है। हालांकि कर्मचंद को दिव्यांगता पैंशन मुहैया करवाई गई है, लेकिन गुजर-बसर के लिए काफी नहीं होती। कर्मचंद अब घर पर रहते हैं और परिवार में कुल पांच बच्चे है। जिनमें 4 लड़कियां व एक लड़का है। तीन बेटियों की शादी बिना किसी बड़े ताम-झाम के शिंदो ने सादगी से कर दी है। वहीं परिवार की सबसे छोटी बेटी सुषमा जो पढ़ाई में काफी होनहार थी।

पिता की बीमारी के चलते उसे अपनी पढ़ाई को बीच में ही विराम लगाना पड़ा। घर का बेटा यशपाल दसवीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया और जिला कुल्लु में चला गया। अब उसका परिवार के साथ अधिक संपर्क नहंीं है। शिंदो देवी बीपीएल में शामिल है और पंचायत के पास कई बार मकान, शौचालय व अन्य सुविधाओं के लिए गुहार लगा चुकी है। कई बार सरकारी टीमें भी घर का दौरा करके गई पर सरकारी योजनाओ को शिंदो के घर का रास्ता नहीं मिला। अब शिंदो देवी के लिए महिला कल्याण बोर्ड की राज्य सदस्य मोनिका सिंह मददगार बन सामने आई हैं।

समाजसेवी मोनिका देवी को जब शिंदो देवी की स्थिति का पता चला तो उन्होंने जहां उसे कुछ रोजगार दिया तो वहीं उसके मकान व शौचालय के लिए सरकारी प्रणाली से मामला उठाया। मोनिका सिंह ने पंचायत अधिकारियों व जिला प्रशासन से शिंदो देवी के परिवार की स्थिति को सांझा किया है, जिससे कुछ आस बंधी है कि शायद अब भूली-भटकी सरकारी योजनाएं खींचकर शिंदो देवी के घर तक ले जाई जा सकें।

अधूरी रह गई पढ़ाई

परिवार की छोटी बेटी सुषमा पढऩे में काफी होनहार थी। सुषमा ने चाहे आगे पढऩे का सपना देखा हो, लेकिन परिवार की जरुरतों च पिता की बीमारी और मां की मजबूरी को देखते हुए सुषमा ने आठवीं कक्षा से अपनी पढ़ाई छोड़ दी। बीमार पिता की देखभाल के लिए सुषमा को अपनी पढ़ाई का त्याग करना पड़ा। अब सुषमा घर पर ही रहती है और मां के काम पर चले जाने के बाद पिता की देखभाल कर रही है और सिलाई सीख रही है।

हैरान हूं कि गरीब की कोई नहीं सुनता

महिला कल्याण कल्याण बोर्ड की सदस्य मोनिका सिंह ने कहा कि मुझे हैरानी होती है जब गरीब की कोई सुनता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं पहले ऐसे गरीबों के पास पहुंचनी चाहिए जिनके पास कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि गरीब को भटकना पड़े तो यह सबसे दुखदायी बात है। उन्होंने कहा कि मैं इस मामले को स्वयं पंचायत, बीडीओ व जिला प्रशासन से उठा रही हूं और यकीन है कि न्याय मिलेगा।

क्या कहते है पंचायत प्रधान

पंचायत प्रधान अमरीक सिंह ने कहा कि पंचायत में हर जरुरतमंद को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सभी पात्र लोगों तक योजना पहुंचे यह हमारा उद्देश्य है। कर्मचंद ओर शिंदो देवी के मामले पर भी उचित कार्रवाई की जाएगी।

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