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सिक्ख समुदाय ने किया रोष प्रकट, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन के माध्यम से की मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

सड़कों पर उतरा सिक्ख समुदाय, पुलिस प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

हिमाचल दस्तक, ओम शर्मा। नालागढ़

पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में अमृतधारी (गात्रा धारक) दो युवकों को परीक्षा हाल में प्रवेश पर रोक के चलते सिक्ख समुदाय सोमवार को सड़कों पर उतरा। भारी तादाता में सिक्ख समुदाय के लोगों ने एसडीएम नालागढ़ के बाहर एकजुट होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सिक्ख समुदाय ने एसडीएम नालागढ़ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। गौरतलब है कि औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के तहत गुल्लरवाला के गुरप्रीत सिंह व ईश्वर धीमान पुलिस की लिखित परीक्षा देने से सोलन के एलआर कालेज में इस लिए रोक दिया गया था क्योंकि उन्होंने अमृतधारी सिक्ख होने के नाते गुरू का गात्रा धारण किया था। दोनों को गात्रा उतारकर अंदर प्रवेश करने के लिए कहा गया, लेकिन युवकों ने अपने धर्म पर अटल रहते हुए पुलिस भर्ती का पेपर नहीं दिया।

जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे

एस.जी.पी.सी. सदस्य व शिरोमणी अकाली दल हिमाचल के प्रदेश के अध्यक्ष दलजीत सिंह भिंडर, जिप सदस्य सरदार यशवंत सिंह, गुरमत प्रचार ट्रस्ट के सचिव महिंद्र सिंह, समाजसेवी गुरचरण सिंह चन्नी, सिख स्टूडेंट फैडरेशन के अध्यक्ष सतनाम सिंह, युवा समाजसेवी राजेन्द्र झल्ला, सुरमुख सिंह, भाई घनईयां सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष चरणजीत सिंह, परमजीत सिंह गे्रवाल, हरपाल सिंह, मोहन सिंह, हरप्रीत सिंह, इंद्रजीत सिंह, अवतार सिंह, हरभजन सिंह, गगनदीप सिंह, मोहन सिंह, अमरजीत सिंह ने कहा कि हिंदोस्तान को आजाद करवाने और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां सिक्खों ने दी। कश्मीरी पंडितों को बचाने के लिए गुरू तेग बहादुर ने शहीदी दी।

गुरू गोंबिद सिंह ने अपना पूरा परिवार बलिदान कर दिया। लेकिन आज सिक्खों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशों में सिक्ख बिना किसी पाबंदी के गुरू की किरपान और दस्तार सजा सकते है। लेकिन हिमाचल में पुलिस अधिकारियों द्वारा दो सिक्ख युवकों के साथ किया गया दुव्र्यवहार सिक्खों की आस्था के साथ खिलबाड़ है। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 25 में सिक्ख समुदाय को किरपान रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि अगर जल्द इस मामले में सरकार की ओर से कोई उचित कारवाई नहीं की जाती है तो समुदाय की ओर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट में केस फाइल किया जाएगा। अगर सरकार मामले पर संज्ञान नहीं लेती तो सिक्खों को अपने मौलिक अधिकारियों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा।

धर्म के लिए ठुकरा दी पुलिस परीक्षा, लोगों ने की सराहना

अपने धर्म के प्रति अडिग रहते हुए गुरप्रीत सिंह और ईश्वर धीमान ने पुलिस की लिखित परीक्षा को ठोकर मार दी। दोनों युवकों ने धर्म के प्रति आस्था के लिए अपना कैरियर दांव पर लगा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। दोनों युवकों ने अपनी किरपान को शरीर से अगल करने की बजाए पुलिस परीक्षा को ठुकरा दिया। वहीं, एसडीएम नालागढ़ प्रशांत देष्टा ने बताया कि यह मामला सिक्ख समुदाय के लोगों की आस्था से जुड़ा है। समुदाय के लोगों ने ज्ञापन सौंपा है जिसे जिलाधीश के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

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