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singer devendra thakur

पहाड़ी गायक देवेंद्र ठाकुर राजगढ़ क्षेत्र के भलग गांव से संबंधित

शेरजंग चौहान। फागू
राजगढ़ उपमंडल के एक ओर कलाकार की इन दिनों पहाडी नाटियों की एलबम लोगों द्वारा पसंद की जा रही है। जिसमें नेंईं आईंदा, नेंईं आईंदा, तेरे गांवटे शांगरे नेंई आईंदा और हामों बोलो छेड़ू रा न खेलो, हो चीते आओ नारणा, इस समय यूट्यूब एवं खुशी भरे आयोजनों में खूब वाहवाही लूट रहे हैं। यूट्यूब पर इन नाटियों पर लाखों लोगों की सराहना मिल चुकी है तथा पहाड़ों पर हर आयोजन में इस नाटी पर नाचना, एक परंपरा सी बन गई है।

इन नाटियों के गायक देवेंद्र ठाकुर ने मुलाकात में बताया कि बेशक ही मेरी कई नाटियां, शादी ब्याह अथवा अन्य आयोजनों में लोगों की पहली पसंद रही हो। मगर में सारी उम्र पहाड़ी संस्कृति से जुड़ा रहूंगा और मौलिक रूप से लिखी गई नाटियां, श्रोताओं एवं दर्शकों के लिए गाता रहूंगा। पहाड़ी गायक देवेंद्र ठाकुर राजगढ़ क्षेत्र के भलग गांव से संबंधित हैं और चार साल की उम्र से ही गायकी की ओर रूझान हो गया था। ये रूझान अपनी माता और मामा की बदौलत हुआ। जिसे बाद में मेरे स्कूल अध्यापकों ने पक्का कर दिया।

इसी प्रेरणा के चलते रमेश धीमान को अपना गुरू बनाया और संगीत की शिक्षा लेने लगे। पहली कैसेट्स ‘ लागे रिम झिम बोरखा’ तथा चरखा नामक कैसेट्स में कई गीत गाए, जिसके लिए, नाटी प्रेमियों की काफी सराहना मिली।

देवेंद्र ने इसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा और अपनी ही, ‘ देव कला मंच भलग”नाम की सांस्कृतिक संस्था की स्थापना की और एनजेडसीसी यानि नॉर्थ जोन कल्चरल सैंटर पटियाला से पंजीकृत कर दिया। इस संस्था के माध्यम से इस दल को देश-विदेश में अपनी कला एवं संस्कृति को सम्मान दिलाने का सुनहरा मौका मिला। इसी दौरान देवेंद्र ठाकुर के दल ने राष्ट्रीय नाटक अकादमी दिल्ली और संगीत नाटक अकादमी में कार्यक्रम दिए और अपनी संस्था और प्रदेश का नाम ऊंचा किया।

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