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Laal Bhairon temple baddi

न डाल सकते हैं मंदिर में लैंटर और न ही रात को रुक सकते हैं पुजारी

अंधेरा होते ही नहीं रख सकता कोई मंदिर में कदम, न ही लगाए जाते हैं ताले

पूरे विश्व में सिर्फ लाल भैरों बाबा के दो ही मंदिर हैं स्थापित

बद्दी चंडीगढ़ मार्ग पर सिसवां में स्थित है लाखों लोगों की आस्था का केंद्र भैरों मंदिर

हिमाचल दस्तक, ओम शर्मा। बद्दी

उत्तर भारत में बद्दी चंडीगढ़ वाया सिसवां मार्ग पर सिसवां में स्थित लाल भैरो बाबा का मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। जहां पर लाल भैरों बाबा साक्षात विराजमान है। पूरे विश्व में लाल भैरों के दो ही मंदिर है, एक मंदिर श्रीकाशी जी बनारस और दूसरा सिंसवा में स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सूरज छिपने के बाद इस मंदिर में कोई कदम नहीं रख सकता, न ही इस मंदिर परिसर में कहीं भी कोई ताला लगाया जाता है।

हैरानी तो इस बात की है कि मंदिर के पुजारियों को भी रात के समय इस मंदिर में रहने की इजाजत नहीं है। जिसके चलते रात को यह मंदिर साक्षात भैरों बाबा की कृपा से बिना किसी ताले बिना किसी सुरक्षित रहता है। पुजारियों की मानें तो यह रोज रात को भैरों बाबा का दरबार लगता है जिसे देखने और सुनने की किसी को इजाजत नहीं है। अगर कोई रात के समय इस मंदिर में प्रवेश करने की हिम्मत करता है तो उसे भैरों बाबा के प्रकोप से कोई नहीं बचा सकता। कुछ समय पहले एक सन्यासी ने रुकने की कोशिश की थी जो कि मंदिर के प्रवेश द्वार में कदम रखते ही पागल हो गया था।

उत्तर भारत के लाखों लोगों की आस्था के केंद्र लाल भैरों मंदिर में शनिवार को तेल और काले माह, दही भल्ला का भोग अर्पण किया जाता है। भैरों बाबा के प्रसाद के रूप में कच्चे चाबल मिलते हैं। भैरों बाबा मंदिर के पुजारी दिलबाग गिर व कुलवीर गिर ने बताया कि हर रविवार को भैरों बाबा मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाता है। ज्येष्ठ महीने में मंदिर में बड़ा भंडारा और मेले का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां पर किसी भी भवन में पक्का लैंटर डालने की अनुमति नहीं है। मंदिर परिसर में भंडारे व श्रद्धालुओं के बैठने के लिए टीन के शैड ही बनाए गए हैं।

मंदिर में भैरों बाबा की 37 फीट ऊंची मूर्ति बनाई गई है जिसका अनावरण 19 नवंबर को किया जाएगा। राजस्थान के शंकर सिंह राजस्थानी, संजीव कुमार, नरेश कुमार, राम पाल ठेकेदार, लवली ठाकुर ने बताया कि सिसवां मंदिर में लाल भैरों साक्षात विराजमान हैं। भैरों बाबा के दरबार में जो भी फरियाद सच्चे मन से लगाई जाती है बाबा उसे पूरी करते हैं। जादू टोने से पीड़ित लोगों द्वारा एक बार भैरों बाबा के दरबार में शीश निभाने से राहत मिलती है। ऐसे पीड़ित लोगों को मंदिर में पुजारियों द्वारा झाड़ा भी लगाया जाता है। जब से बद्दी चंडीगढ़ सिंसवा रोड़ बना है यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बेहताशा वृद्धी हुई है। लोग देश के कोने कोने से साक्षात लाल भैरों बाबा का आर्शीवाद लेने व कष्टों से मुक्ति के लिए पहुंचते हैं।

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