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politicians became angry

कहीं सिपहसालारों तो कहीं नेताओं ने भी निकला गुस्सा

मतदान के बाद की चर्चा ने डराया नेताओं को, जिले में चौकाने वाले रहेंगे नतीजे

राजीव भनोट। ऊना

जिला ऊना के पांच विधानभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने 22 प्रत्याशियों का भागय बटन दबाने ईवीएम मशीन में बंद कर दिया है। ईवीएम के आंकड़े 18 दिसंबर को खुलेंगे, लेकिन मतदान के प्रतिशत व टे्रंड ने नेताओं व राजनीतिक दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अधिक मतदान परिवर्तन का संकेत करता है। ऐसे में जिला के हर विधानसभा क्षेत्र में पिछली बार के मुकाबले अधिक हुआ मतदान नेताओं के माथे पर लकीरें खींच रहा है।

राष्ट्रीय मुद्दों का भी प्रभाव चुनाव में हुए मतदान में देखने को मिला

हालांकि ज्यादा हुए मतदान में युवा मतदाओं की भूमिका बढ़ी है। जिला के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान के बाद वोटर खुलकर बोलता नजर आया। कहीं मतदाता ने नेता का समर्थन किया, तो कहीं-कहीं नेता के विरूद्व भी मतदान दिया। यही नहीं नेताओं के साथ रहने वाले चेहरों व सिपहसालारों का खमियाजा भी चुनाव में नेताओं को भुगतना पड़ा है।

कहीं कम तो कहीं ज्यादा। मतदाता ने अनेक विषय को ध्यान में रखकर मतदान किया, लेकिन उसके लिए गांव, पंचायत व हलके के मुद्दे ज्यादा प्रमुख रहे हैं। राष्ट्रीय मुद्दों का भी प्रभाव चुनाव में हुए मतदान में देखने को मिला। नेताओं व सिप्पासलारों को कैसे मतदाता ने अपनी नराजगी दिखाई है, यह 18 दिसंबर के परिणाम बूथ के रिजल्ट से पता चलेगा।

फिलवक्त जिला के पांचो विस क्षेत्रों में कहीं मतदाता भारी दिखा, तो कहीं राजनीतिक दलों पर अंदरूनी मार भी देखी गई। अंदरूनी मार ने कुछ हलकों में नेताओं के वोट गणित पर फर्क डाला है। अंदरखाते ऐसे लोगों की जहां सूचियां बनने लगी है, वहीं दूसरी ओर मतदान के बाद की हवा फिजाओं को गर्म कर नेताओं की नींद उड़ा रही है।

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