Nadda contesting election

धूमल की घोषणा के बाद कांग्रेस को मिली ऑक्सीजन

लेकिन बंबर की दबंगई को बड़ा मुद्दा बनाया भाजपा ने

ग्राउंड रिपोर्ट। राजेश मंढोत्रा/ बिलासपुर

बिलासपुर सदर सीट पर इस बार चुनाव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ही लड़ रहे हैं। भाजपा की ओर से प्रेम कुमार धूमल के सीएम कैंडिडेट घोषित होने के बाद भी ये सीट सीधे तौर पर नड्डा की प्रतिष्ठा से ही जुड़ी हुई है।

उन्होंने ही सुभाष ठाकुर को कांग्र्रेस के बंबर ठाकुर के खिलाफ उतारा और वही प्रचार की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। ये भी कम रोचक नहीं है कि इस सीट पर नड्डा के अलावा अब 4 को राजनाथ सिंह आ रहे हैं, लेकिन धूमल का कार्यक्रम अब भी तय नहीं। दूसरी ओर बंबर के लिए एक जनसभा सिर्फ मुख्यमंत्री वीरभद्र ने अब तक की है। नड्डा के सीएम बनने की संभावनाओं के कारण ही इस सीट पर भाजपा के सुभाष ठाकुर मुकाबले में आए।

वह पहली बार चुनाव लड़ रहे बंबर ठाकुर से करीब 5 हजार मतों से हारे थे

नड्डा 1993 में उसी तरह सीटिंग विधायक सदाराम ठाकुर का टिकट कटवाकर चुनाव मैदान में आए थे, जैसे झंडूता में जेआर कटवाल ने रिखीराम कौंडल का पत्ता कटवाया। नड्डा यहां से दो बार मंत्री और एक बार नेता प्रतिपक्ष भी रहे। पिछली बार मुख्यमंत्री रहते धूमल ने इस सीट पर सुरेश चंदेल को उतारा था। वह पहली बार चुनाव लड़ रहे बंबर ठाकुर से करीब 5 हजार मतों से हारे थे। इस बार नड्डा ने चंदेल की जगह सुभाष ठाकुर को उतारा। बंबर बिलासपुर शहर से हैं और सुभाष ठाकुर बरमाणा की तरफ से।

सुभाष ठाकुर का चयन इस लिहाज से रणनीतिक भी लग रहा है, क्योंकि बरमाणा ट्रक यूनियन के प्रभाव वाले एरिया में इसका क्या असर होता है? ये देखने वाली बात होती। बिलासपुर शहर में नड्डा का प्रभाव ही उनके काम आ रहा है। पिछले चुनाव में बंबर की दंबगई उनके लिए पॉजिटिव फैक्टर थी, लेकिन इस बार भाजपा इसे गुंडागर्दी के रूप में प्रचारित कर रही है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

भाजपा लोगों से पहला वादा यही कर रही है कि बिलासपुर में सरकारी कर्मचारियों को भयमुक्त वातावरण देंगे और स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ बंबर की वजह से नहीं आ रहा है। दूसरी ओर बंबर ठाकुर की निर्भरता अब भी ग्रामीण क्षेत्रों पर है। नगर परिषद के अलावा इस विधानसभा क्षेत्र में 34 ग्राम पंचायतें हैं और असली लड़ाई यहीं है। बंबर गरीब के हक की लड़ाई लडऩे का वादा करते हुए अपने पिछले पांच साल के काम गिना रहे हैं।

बिलासपुर सीट पर चुनावी गणित

सदर सीट पर पिछली बार 71367 वोटर थे और 50778 पोल हुए थे। कांग्रेस के बंबर ठाकुर को 24347 वोट पड़े थे और भाजपा के सुरेश चंदेल को 19206 वोट। निर्दलीय जितेंद्र चंदेल और केडी लखनपाल ने मिलकर करीब 6000 वोट लिये थे। इस बार भी इस सीट पर सीधा मुकाबला है और वोटर भी बढ़कर 76000 हो गए हैं। इनमें से इस बार करीब 60 हजार के पोल होने की संभावना है।

धूमल के नाम के बाद बदला माहौल

बिलासपुर सदर सीट ही नहीं, जिला की चारों सीटों पर प्रचार की स्थिति धूमल की घोषणा से पहले अलग थी। लेकिन सीएम प्रोजेक्ट होने के बाद अचानक माहौल बदला है। बावजूद इसके भाजपा मोमेंटम नहीं खोना चाहती। पार्टी दफ्तर संभाल रहे कार्यकर्ता भी इस तरह स्थिति से समझौता किये हुए हैं कि नड्डा जी एक दिन जरूर सीएम बनेंगे, लेकिन अभी धूमल की घोषणा से बिलासपुर में भी फायदा होगा।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams