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कांग्रेस में शामिल होने पर सुरेश चंदेल ने सुनाई व्यथा

चंदेल के बाद अब उर्मिल पर होने लगी चर्चा

सुरेंद्र कटोच। हमीरपुर
अपने राजनीतिक करियर के चौराहे पर खड़े पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने आखिर कांग्रेस का दामन थाम ही लिया। साथ ही उन्होंने हिमाचल दस्तक से अपनी व्यथा भी ब्यान कर दी। उनका मानना है कि वे मन से कांग्रेस में नहीं गए, अलबता अब उनके पास कोई विकल्प भी नहीं रह गया था। वे कुंद होकर नहीं रहना चाहते है। समाज सेवा के लिए जीवन को अर्पित किया है तो समाज सेवा करनी है, उसके लिए प्लेटफार्म तो चाहिए ही। उनका मानना है कि इस विषय पर धूमल से मिले थे, लेकिन धूमल जो कह रहे थे उसे ऊपर वाले सुन नहीं रहे थे या फिर वे सुनना नहीं चाह रहे थे। धूमल चाह रहे थे कि विषय संभल जाए, लेकिन ऊपर वाले शायद विषय को संभालना नहीं चाह रहे थे।

सुरेश चंदेल की यह व्यथा खासतौर पर हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के लिए कई प्रश्न भी खड़े करती दिख रही है। अब वह हमीरपुर मुख्यालय में कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर के नामांकन के दिन 25 अप्रैल को आएंगे। उस दिन चंदेल के संबोधन पर सबकी नजरें रहेगी। चंदेल के जाने पर स्वयं धूमल ने भी माना है कि इससे भाजपा को नुकसान तो होगा ही। अब देखना ये है कि चंदेल कांग्रेस में जाकर कितना डेंट भाजपा को डालते है और कांग्रेस भी उन्हें कितना स्वीकार करती है।

वजह ये है कि इससे पहले नरेंद्र ठाकुर जैसे भाजपाई भी कांग्रेस में जाकर वापस आ चुके है। उन्हें कांग्रेस जमात ने कभी स्वीकार ही नहीं किया। राजेंद्र राणा आज तक कांग्रेस में अपनी पैठ बनाने की जद्धोजहद में लगे हुए है। उधर, अब चंदेल के जाने के बाद उर्मिल की घर वापसी पर सबकी नजर है।

सूत्र बतातें है कि उर्मिल को जनवरी माह में ही घर वापसी करवाना तय था, लेकिन किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाया। अब उर्मिल की वापसी का प्रस्ताव जिलाध्यक्ष ने प्रदेश हाई कमान को भेज दिया है। धूमल का कहना है कि उर्मिल की वापसी का पता संगठन को हेागा। भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल ठाकुर ने बताया कि उनका प्रस्ताव प्रदेश हाईकमान को भेज दिया है।

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