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The choice to maintain and break tradition in Hamirpur

भाजपा व कांग्रेस के दबाव के चलते फील्ड में डटे रहे नेता ,  कुछ को है इनाम की आस तो कुछ किला बचाने में जुटे

राजीव भनोट। ऊना : हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बड़ा सवाल यह है कि भाजपा जीत की परंपरा को कायम रखेगी या कांग्रेस इस बार इस परंपरा को तोडऩे में कामयाब होगी? भाजपा प्रचार व जनसंपर्क से लेकर रणनीति बनाने तक कांगे्रस पर 21 रही पर बावजूद इसके कांग्रेस ने इस चुनाव को रोचक मोड़ पर ला खड़ा कर दिया।

2019 का लोस चुनाव केवल एक चुनाव न होकर एक प्रतिस्पर्धा में बदला रहा। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र ऐसा हलका है जो ऊना-हमीरपुर-बिलासपुर के साथ कांगड़ा के दो व मंडी के एक विस क्षेत्र को मिलाकर बनता है। भाजपा-कांग्रेस नेतृत्व के बेहतर रिपोर्ट कार्ड के डंडे ने नेताओं को अपनी-अपनी फील्ड में डटे रहने पर मजबूर करके रखा। दो माह लंबे चुनाव प्रचार के बाद मतदान का दिन आ गया है, 23 मई को रिपोर्ट कार्ड भी पेश कर देगा।

इस संसदीय क्षेत्र में अनुराग ठाकुर जीत का चौका लगाने की जुगत भिड़ाते दिखे, तो रामलाल ठाकुर कांग्रेस की लगातार हार का क्रम तोडऩे के लिए फील्ड में डटे रहे। इस हलके के सभी 17 विधानसभा हलकों में जीते हुए विधायकों को अपना वोट मार्जिन कायम रखने के लिए जद्दोजहद की है, तो हारे हुए विधायक अपने वोट परसेंटेज में सुधार के लिए डटे रहे। बहरहाल इन सभी नेताओं की कारगुजारी इस दौरान क्या रही, यह 23 मई को ईवीएम मशीन ही बता पाएगी।

अनुराग के लिए प्रेम कुमार धूमल, जयराम ठाकुर व सतपाल सत्ती ने जनसभाएं कीं और अंतिम चरण में जेपी नड्डा ने मतदाताओं से संपर्क साधा। दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रत्याशी रामलाल ठाकुर के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री, पूर्व सांसद सुरेश चंदेल, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खु, प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर व राजिंद्र राणा फील्ड में रहे।

इस हलके में भाजपा की तरफ से बड़ी रैली अमित शाह द्वारा बिलासपुर में की गई, जिसमें शाह ने अनुराग को बड़ा नेता बनाने की बात कह मास्टर स्ट्रोक चला तो वहीं रामलाल के लिए ऊना में राहुल गांधी, हरोली में गुलाम नवी आजाद, आचार्य प्रमोद व बिलासपुर में नवजोत सिद्धु ने प्रचार कर माहौल बनाने का प्रयास किया।

प्रचार के दौरान दोनों ओर से जमकर शब्दों को वाण चलते रहे। एक-दूसरे को कमजोर साबित करने के लिए कई बार तो भाषा की मर्यादा भी ताक पर नजर आई। बहरहाल मतदान की इस निर्णायक घड़ी तक पहुंचते-पहुंचते मंडी संसदीय हलके की जनता को राजनीतिक दलों के कई रूप देखने को मिलते रहे।

अनुराग ठाकुर ने रजिंद्र राणा को 98403 मतों से दी थी मात

2014 के लोस चुनाव में अनुराग व रजिंद्र राणा के बीच संघर्ष हुआ। इस चुनाव में अनुराग को 4,68,035 लाख वोट पड़े, जबकि रजिंद्र राणा को 3,49,632 मत पड़े। अनुराग ने 98403 मतों से रजिंद्र राणा को मात दी थी। इस बार कैसे आंकड़े रहेंगे, यह तो 23 मई को ही पता लगेगा।

 

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