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Govt School Bilaspur

अनूप शर्मा। बिलासपुर

बिलासपुर जिले के सरकारी प्राथमिक स्कूलों के अभिभावकों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं अब भाने लगी हैं। जिनका असर स्कूलों की छात्र संख्या की बृद्धि के रूप में दिखने लगा है। हालांकि प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तहत आने सभी स्कूलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। लेकिन कुल 592 स्कूलों में से 71 स्कूलों में बच्चों का आंकड़ों में बृद्धि हुई है। जिससे स्पष्ट है कि अब अभिभावकों का मोह निजी स्कूलों से मोह भंग हो रहा है। ऐसे में अगर प्रारंभिक शिक्षा विभाग के आंकडों पर गौर करे तो इस वर्ष कुल 592 स्कूलों में से 71 स्कूलों में लगभग 400 बच्चों का आंकडा बढ़ा है। जो सरकारी शिक्षण संस्थाओं के लिए एक अच्छी खबर हैं।

प्रारंभिक शिक्षा विभाग के आंकडों के मुताबिक बिलासपुर सदर ब्लाक के 18 स्कूलों में वर्ष 2018 में 526 बच्चे अध्ययनरत थे जबकि वर्ष 2019 में यह आंकडां 618 तक पहुंचा गया है। वहीं घुमारवीं शिक्षा खंड वन में गत वर्ष 517 बच्चे पंजीकृत थे। लेकिन इस वर्ष यह आं$कड़ा 617 तक पहुंच गया है। घुमारवीं शिक्षा खंड दो में गत वर्ष 466 व इस वर्ष 525 तक पहुंचा है। जबकि झंडूत्ता शिक्षा खंड में 576 बच्चे पंजीकृत थ्रे। जबकि इस वर्ष 649 का आंकड़ा है। और स्वारघाट शिक्षा खंड में गत वर्ष 755 का आंकड़ा था जो इस वर्ष 846 का आंकड़ा पार कर गया है।

Govt School Bilaspur

गौरतलब र्है कि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा तमाम सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों के अलावा अन्य ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा मुफ्त वर्दी , दोपहर का भोजन, खेल मैदान सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। फिर भी अपेक्षा के अनुरूप छात्र संख्या पिछले काफी वर्षो से कम हो रही थी। लेकिन पिछले दो तीन वर्षो से अभिभावकों का मोह निजी स्कूलों से मोह भंग होने लगा है। इस बार सरकारी स्कूलों की छात्र संख्या बढ़ाने में स्कूल प्रबंध समितियों व शिक्षकों की भी अहम भूमिका मानी जा रही है।

उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक सुदर्शन कुमार ने कहा कि बिलासपुर जिले के निजी स्कूलों की अपेक्षा अभिभावक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना बेहतर समझ रहे हैं। जिला बिलासपुर में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कुल करीब 592 प्राईमरी स्कूल हैं। जिला भर में सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के महत्व को बच्चों के परिजनों को समझाने से सामने सकारात्मक परिणाम आए हैं।

पहले सरकारी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश बहुत कमी आ गई थी मगर इस चालू वर्ष में करीब चार सौ बच्चों की संख्या बढ़ी है जोकि हर्ष का विषय है। उन्होंने यह भी चेताया अगर सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत कम जाती है तो निश्चित तौर पर स्कूल बंद होने से अध्यापकों के पद भी समाप्त होना तय है। उन्होंने कहा कि उनके पास निजी स्कूल प्रबंधनों के द्वारा बच्चों के परिजनों से लूट खसूट करने की भी उनके पास शिकायतें आई थी। जिनका कि निपटारा कर दिया गया है।

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