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three pregnant women

अस्पताल प्रशासन के सौ बेड लगाने के दावे की निकली हवा

धर्मचंद वर्मा। मंडी
जोनल अस्पताल आजकल सुर्खियों में है। इस अस्पताल का जच्चा-बच्चा वार्ड फिर विवादों में है। पिछले दिनों मीडिया द्वारा गाइनी वार्ड का मुद्धा उछालने के बाद आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था को सुधारने के नाम पर सौ बेड लगाने की बात तो कर दी। मगर जब असल में देखा गया तो आज भी एक बेड पर दो और तीन गर्भवती महिलाएं सोने के लिए मजबूर हैं। आलम यह है कि इन महिलाओं को वे सौ बेड नहीं मिल पा रहे हैं जिसकी घोषणा अस्पताल प्रशासन ने की है।

मीडिया में आए उबाल के बाद अब अस्पताल प्रशासन भी चुप्पी साध चुका है। जबकि महिलाओं का कहना है कि दाखिल तो कर लेते हैं मगर व्यवस्था राम भरोसे है। हांलाकि कुछ लोगों को कहना है कि अगर अस्पताल के पास बेड नहीं हैं तो वे अपने बेड लाने के लिए भी तैयार हैं। बशर्ते हैं कि उन्हें जगह तो दी जाए। मंडी के जोनल अस्पताल का गाइनी वार्ड की व्यवस्था कुल्लू जिले की वजह से बिगड़ी है। क्योंकि उक्त जिले में गाइनी स्पेशलिस्ट न होने के कारण वे भी मंडी के जोनल अस्पताल में भेजे जा रहे हैं।

क्या कहते हैं एमएस

इस बारे में एमएस डॉ. टीसी महंत ने माना कि मरीजों की तादाद तो बड़ी है, पर बेडों की सख्ंया नहीं बढ़ पाई। उन्होंने कहा कि इस बारे उच्चाधिकारीयों को बता दिया है। आपातकाल में गैलरी में अतिरिक्त बेड लगा दिए जाते हैं।

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