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Through Satsanga and Katha, man reaches Lord's refuge: Acharya Sandeep

विजय शर्मा सुंदरनगर। :  नगर परिषद के चांगर स्थित देव बाला कामेश्वर भंडारा कमेटी द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में वीरवार को चौथे दिन कथा व्यास आचार्य संदीपन वशिष्ठ ने प्रवचन करते हुए कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मु य विषय भक्ति योग है। जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है।

इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद् भागवत मोक्ष दायिनी है। सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्री कृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा।
आज हमारे यहां भागवत रूपी रास चलता है, परंतु मनुष्य दर्शन करने को नहीं आते। वास्तव में भगवान की कथा के दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है। भंडारा कमेटी के प्रधान हेमचंद शर्मा व दीपक धीमान ने बताया भागवत के समापन पर 24 जून को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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