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Twenty days later, there was no clue of Vanakatu as well as the police

उरला के कसयाण जंगल मे चीड़ के पेड़ों का हुआ था रातो रात अवैध कटान , सड़क की अलाइनमेंट कर काटे गए थे तीस हरे भरे पेड़ ,पुलिस द्वारा जांच में ढील को लेकर भी उठने लगे सवालिया निशान

ललित ठाकुर । पधर : वन परिक्षेत्र उरला के अधीन कसयाण जंगल में हुए अवैध कटान के मामले का अभी तक कोई सुराग नही लग पाया है। घटना के बीस दिन बीत जाने बाद भी पुलिस वनकाटुओं का पता नही लगा पाई है। जिससे वन विभाग भी हैरत में है।

 उल्लेखनीय ही कि कसयाण जंगल मे वनकाटुओं ने रातों रात चीड़ के तीस हरे भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला कर लाखों रुपए की अनमोल वन संपदा तबाह कर दी थी। वन विभाग ने पंद्रह नवबर को मामले की एफआईआर पधर थाना में दर्ज करवाई है। लेकिन बीस दिन बीतने बाद भी पुलिस कोई सुराग नही लगा पाई है।
 हालांकि पुलिस ने वन विभाग के मुताबिक शक के आधार पर कस्याणी जंगल पर हक हकूक रखने वाले जगेहड़ गांव के लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कसयाण जंगल में जिस जगह पर अवैध कटान हुआ है, उस क्षेत्र से सड़क निर्माण को लेकर चुने की अलाइनमेंट की गई है। उस सड़क के निर्माण से केवलमात्र जगेहड़ गांव ही लाभान्वित होना था ।
 वहीं घटना को अंजाम देने से पहले जगेहड़ गांव के ग्रामीणों ने ही पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ यहां अलाइनमेंट लेकर एफआरए की औपचारिकता पूरी करने की मुहिम शुरू की थी। लेकिन बीस दिन बाद भी पुलिस के हत्थे कोई सुराग न लगना एक प्रश्नचिन्ह बना हुआ है। इसके पीछे राजनीतिक दबाब तो नही यह भी कयास लगाए जा रहे हैं। इतनी भारी मात्रा में वन संपदा की तबाही के बावजूद मामले की जांच में ढील बरती जा रही है।
जंगल मे चुने के साथ की गई सड़क की अलाइनमेंट के बावजूद पुलिस ने न तो लोक निर्माण और न ही राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से मामले को लेकर कोई पूछताछ की है। जबकि घटना के दो दिन पहले ही दोनों विभागों के कर्मचारियों ने यहां जगेहड़ गांव के ग्रामीणों के साथ अलाइनमेंट देकर पेड़ों की गणना कर रेवेन्यू पेपर तैयार करने का कार्य शुरू किया था।
उधर, वन विभाग के मुताबिक वन परिक्षेत्र उरला कार्यलय ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर वनमंडल अधिकारी जोगिंदरनगर को दे दी है। जिसमे आरोप सिद्ध होने पर दस साल के लिए बर्तनदारी समाप्त करने की कार्रवाई वन महकमा करेगा।
बहरहाल वन विभाग ने जंगल मे काटे गए पेड़ों के लॉग्स बना कर वन परिक्षेत्र कार्यलय में जमा किए हैं।
“मामले को लेकर पंद्रह नवंबर को पुलिस थाना पधर में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। लेकिन पुलिस अभी तक कोई भी सुराग नही लगा पाई है। जबकि जंगल मे की गई अलाइनमेंट से एकमात्र जगेहड़ गांव ही लाभान्वित होता है।” 
–हरदेव सिंह, वन परिक्षेत्र अधिकारी उरला।
“मामले की जांच चल रही है। ग्रामीणों को थाने में तलब कर पूछताछ की जा रही है। जांच में किसी प्रकार की ढील नही बरती जा रही है। शीघ्र ही आरोपियों का सुराग लगाया जाएगा। “
–मदनकांत शर्मा, डीएसपी पधर

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