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ग्रामीणों में बना दहशत का माहौल

अमित सूद। जोगिंद्रनगर
जोगिंद्रनगर में 13 वर्ष से निमार्णाधीन 100 मैगावाट की उहल चरण तीन पनबिजली परियोजना के पेनस्टॉक के नीचे लगाए गए लकड़ी के स्लीपरों के चलते पिल्लर में दरारें आ गई हैं। इन दरारों को भरने के लिए विभाग ने विदेश से एक विशेष किस्म का केमिकल मंगवाया है। इस लिहाज से मई माह में जनता को समर्पित होने वाली इस परियोजना में अभी ओर वक्त लग सकता है। बता दें कि मच्छयाल से चूल्हा तक करीब 8 किमी की टनल बनाई गई है चूल्हा से उपर रक्तल साइट के पास ही विभाग को लीकेज दूर करने में परेशानी पेश आ रही है।

तुलाह पंचायत के पूर्व प्रधान रणजीत चौहान ने कहा कि बीवीपीसीएल अपनी खामियों को छिपाकर इस परियोजना का जैसे-तैसे उद्घाटन करवाना चाहती है। लेकिन उनकी यह जल्दबाजी स्थानीय गांव गुलाणा, सनहाली तथा रक्तल के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। चौहान ने कहा कि पेनस्टॉक को लकड़ी के स्लीपरों के सहारे खड़ा रखना जोखिम भरा दिखाई पड़ता है। कहीं यहां हादसा पेश आया तो तीनों गांव पर यह परियोजना भारी पड़ सकती है।

पेनस्टॉक में पूरे प्रेशर से जब पानी डाला जाएगा तो इसके फ टने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2009 ही परियोजना के निर्माण पर सवाल उठाए थे तथा इसकी गुणवता की जांच सीबीआई तथा ऐटीक्रप्शन विभाग से करवाने की मांग की थी उन्होंने कहा कि पेनस्टाक में पड़ी दरारों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उहल चरण तीन परियोजना का कार्य वर्ष 2004 में शुरू किया गया था जिसको 2008 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। इस पर 432 करोड़ रुपये खर्च आने की बात कही गई थी। लेकिन अब इस परियोजना में करीब 1500 करोड़ से उपर खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी यह प्र्रदेश को समर्पित नहीं हो पाई है।

टेस्टिंग के बाद ही होगा उद्घाटन

उधर, परियोजना के अधिशाषी अभियंता राजीव शर्मा ने कहा कि परियोजना की टेस्टिंग का कार्य चल रहा है कोई भी त्रुटी सामने आती है तो उसे ठीक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टेस्टिंग के दौरान एक पिल्लर में दरारें देखी गई हैं और इसे दूर किया जा रहा है। सभी त्रुुटीयों को दूर करने के पश्चात ही परियोजना का शुभारंभ किया जाएगा।

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