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PGI रेफर को 1 कि.मी. पर मिला सफल इलाज

आंख के चोटिल को नहीं मिली सरकारी सुविधा

राजीव भनोट। ऊना
क्षेत्रीय अस्पताल ऊना का नया कारनामा सामने आया है, इससे अस्पताल फिर से चर्चा में आ गया है। आंख के चोटिल 20 वर्षीय मजदूर को प्राथमिक इलाज के बाद कुछ मिनटों में पीजीआई रेफर कर दिया गया, लेकिन तीमारदारों की सुझबुझ से अस्पताल से एक किलोमीटर दूर मजदूर का निजी अस्पताल में सफल ऑप्रेशन कर दिया गया। इतना ही नहीं मजदूर को स्थिर हालत में दो घंटे बाद वापिस घर भी भेज दिया गया। यदि पीडि़त को निजी अस्पताल में ही सेवाएं लेनी है, तो सरकारी तंत्र का क्या फायदा।

इस मामले में ऊना जनहित मोर्चा ने जिलाधीश को पत्र भेज मामले की जांच करने की मांग उठाई है। बताते चले कि इंतजार पुत्र इलयास निवासी पेखूवेला सोमवार सुबह इंडियन ऑयल डिपो में रोजाना की तरह मजदूर करने गया। इसी दौरान अचानक एक सरिया सीधा इंजतार की आंख में जा घुसा। गंभीर हालत में मजदूर को स्थानीय लोगों की मदद से क्षेत्रीय अस्पताल ऊना लाया गया।

पैसे न होने के कारण तीमारदारों की हवाईयां उड़ गई

जहां पहले तो नर्सों ने कहा कि आंखो का डॉक्टर ही आकर इलाज करेगा, लेकिन कुछ समय बाद इमरजेंसी डयूटी पर तैनात पीएस राणा ने मजदूर को देखा और प्राथमिक इलाज किया। इसी दौरान आंखो के विशेषज्ञ डॉ. आशीष साहनी को बुलाया गया। उन्होंने मरीज को चैक किया और गंभीर हालत बताते हुए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया और तीमारदारों को कहा कि 12 घंटे के भीतर ऑप्रेशन करना जरूरी है, यहां नहीं हो सकता। इस पर तीमारदार परेशान हो गए। पैसे न होने के कारण तीमारदारों की हवाईयां उड़ गई।

जब सरकारी तंत्र ने जवाब दे दिया, तो उन्होंने विवेक से फैसले लेते हुए नंगल रोड पर स्थित चौहान आई अस्पताल में दिखाने का निर्णय लिया, जहां डॉ. सीएस चौहान ने मरीज की हालत को देखा और करीब 35 मिनट तक ऑप्रेशन कर उसकी हालत को स्थिर कर दिया। डॉ. चौहान के मुताबिक सरिया आंख में घुसने से आंख डैमेज हुई है और खून भी बहा है। ऐसे में ऑप्रेशन सफल हुआ है। पट्टी खुलने के बाद अगामी इलाज होगा। मरीज खतरे से बाहर है। अस्पताल में आप्रेशन क्यों नहीं हो पाया, इस पर डॉ. चौहान ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।

क्या कहते है CMO प्रकाश दड़ोच

जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रकाश दड़ोच ने कहा कि मामला ध्यान में है। आंख का चोटिल रोगी सुबह अस्पताल पहुंचा था, जिसे डा. ने प्राथमिक इलाज के बाद रेफर किया था। निजी अस्पताल में आप्रेशन होने की जानकारी नहीं है। एमएस ही ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। मैं उनसे रिपोर्ट लूगां।

ऊना जनहित मोर्चा ने DC को भेजा पत्र

ऊना जनहित मोर्चा के महासचिव राज कुमार पठानिया ने इस मामले में जिलाधीश विकास लाबरू को जांच के लिए पत्र लिखा है। ताकि पता चल सके कि आखिर जो आप्रेशन निजी अस्पताल में हुआ, वह अस्पताल में क्यों नहीं हो पाया। गरीब व मजदूर को बिना वजह क्यों तंग किया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में रेफर की परंपरा खत्म होनी चाहिए और इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार से भी मामला उठाया जाएगा।

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