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नग्गर में धूमधाम से मनाया गनेड़ उत्सव

नग्गर और जाणा घाटी के हजारों लोगों के बीच हुई रस्सा दौड़

सुदर्शन ठाकुर। पतलीकूहल
ऊझी घाटी के धरोहर गांव नग्गर में बुधवार को गनेड़ उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस गनेड में जहां दो फाटी जाणा और नग्गर के बीच एक रस्सा दौड़ हुई। इस दौरान माता त्रिपुरा सुंदरी के जेठाली के सिर के ऊपर सिंग लागए जाते हैं और अश्लील दोहे भी बोले जाते हैं। इस प्राचीन प्रथा को देखने के लिए बुधवार देर शाम को नग्गर में घाटी के सैकड़ों लोगों और पर्यटकों की काफी भीड़ लग रही। गनेड़ को देखने आए लोग जाणा के देवता जीव नारायण और अन्य देवताओं का आशीर्वाद भी लेते हैं।

वहीं नग्गर गनेड का आगाज बुधवार सुबह पारंपरिक वाध्य यंत्रों ढोल व नगाड़ों के साथ हुआ। बुधवार सुबह गांव के बच्चे शेलडी मंदिर के पास इकट्ठा हुए और मंदिर से दकीयारी बेहड़ तक 18 चक्कर लगाए। सभी लोग एक स्थान पर इकट्ठा हुए और उसके बाद पूरे गांव में घर-घर गए और इनके आगमन पर हर घर के मालिक ने टोली पर अखरोट फैंके। जबकि यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। दोपहर बाद जब जाणा गांव के अधिष्ठता देवता जीव नारायण के हरियान देवता के निशान के साथ आए तो दूसरी तरफ माता त्रिपुरा सुंदरी के जठाली के सिर के ऊपर सिंग लगाने की प्रक्रिया को शुरू किया।

माना जाता है कि रस्सा दौड़ जीतने पर इलाके में सुख समृद्धि होती है।

इसके बाद उन्हें प्राचीन रीति रिवाज से मूसल पर बिठा कर देव स्थल के इर्द-गिर्द चक्कर लगाए और नग्गर कैसल के समीप लाया गया। वहां पर असुरी शक्तियों को भगाने के लिए अश्लील दोहे बोले गए। मूसल पर बिठाकर जब उसे कंधों पर बिठाते है तो जेठाली विदूषक की तरह व्यवहार करता है। यह कार्य देव स्तुति अनुसार आरंभ हुआ। इस दौरान जेठाली इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करता है।

बुधवार देर शाम को रसियों और घास से एक बहुत बड़ा रस्सा बनाया गया। जिसे की स्थानीय भाषा में गूण कहा जाता है। इस गूण की विधि पूर्वक पूजा करने के पश्चात गूण का अगला सिरा जाणा फाटी के लोगों ने और पिछला सिरा नग्गर फाटी के लोगों ने पकड़ा। इसे एक बहुत बड़े खेत से ऊपर से नीचे दौड़ लगाते हुए दोनों फाटी के लोगों ने जोर आजमाइश की।

इस प्रक्रिया को इसी प्रकार तीन बार दोहराया गया। इसी विधि को देखने के लिए घाटी के साथ- साथ पर्यटकों में भी काफी उत्साह देखने को मिलता है। देर शाम तक सभी देव रीति पूरी होने के बाद नग्गर गनेड संपन्न हो गई। माना जाता है कि रस्सा दौड़ जीतने पर इलाके में सुख समृद्धि होती है।

यहां है सींग लगाने की मान्यता

जिला कुल्लू में सिर पर सींग लगाने की परंपरा अलग-अलग है। लेकिन ऊझी घाटी के नग्गर में माता त्रिपुरा सुंदरी के सम्मान में मनाए जाने वाले गनेड़ उत्सव में आसुरी शक्तियों के प्रभाव को कम करने के लिए जेठाली के सिर पर सींग लगाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां प्राचीन समय में शक्तिशाली असुर रहता था। उसके आतंक से लोग काफी दुखी थे तो माता त्रिपुरा सुंदरी ने उसे परास्त किया था। तक से लेकर जेठाली को पारंपारिक देव आभूषण पहनाकर असुर का रुप देते हैं और पूजन करते हैं।

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