Virbhadra Singh will have to bring forward

एक होकर चुनाव लड़ें तो भाजपा से छीन लेंगे चारों सीटें , सरकार का विपक्ष से नहीं डायलॉग, हमारेसमय ऐसा नहीं था,  सीमेंट कीमतें कम करवाने की सरकार की मंशा नहीं लगती , डर है, कहीं उडऩे वाला मुख्यमंत्री ही न बन जाएं जयराम

राजेश मंढोत्रा। शिमला : नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री कांग्रेस के भीतर चल रही वर्चस्व की जंग पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं। वह खुद लोकसभा चुनाव लडऩे को इच्छुक नहीं, पर इस कोशिश में हैं कि कांग्रेस एक होकर चुनाव लड़े, क्योंकि पिछले चुनाव में पार्टी ने चारों सीटें खोई थीं। पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश…

 जयराम सरकार के पहले साल में कोई ऐसा काम, जिसमें आप सरकार का साथ देना चाहते हों? सहयोग करना चाहते हों?
हम जरूर साथ देते, यदि केंद्र सरकार से राज्य के सिर पर पड़ा 50 हजार करोड़ का कर्जा माफ हो गया होता। यदि मोदी सरकार ने औद्योगिक पैकेज को बहाल कर दिया होता। यदि चुनावी लाभ के लिए घोषित 69 एनएच के लिए 65000 करोड़ केंद्र से ये ले आए होते। पर हमें पता है ये मादा सरकार में नहीं है कि दिल्ली में मुंह खोल सकें। इन्होंने तो 15वें वित्तायोग तक से कर्जा माफी के लिए मांग तक नहीं उठाई। ड्रग्स के खिलाफ कानून सख्त करने की मांग हम कर रहे थे, उसमें भी विधेयक लाने में देरी कर दी। एक तथ्य ये भी है कि विपक्ष के सहयोग का महत्व ये सरकार शायद समझती भी नहीं। कोई डायलॉग ही नहीं है पक्ष और विपक्ष के बीच। मैं खुद संसदीय कार्यमंत्री रहा हूं। राज्य हित के मसलों पर कई बार दोनों ओर चर्चा करवा चुका हूं। लेकिन ये इस एक साल में कभी नहीं हुआ।
उद्घाटन और शिलान्यास पट्टिकाओं पर हारे हुए लोगों का नाम लगाने का आप विरोध कर रहे हैं। यही मुद्दा विपक्ष में रहते हुए भाजपा विधायक उठाते थे। अब सरकार से उम्मीद क्यों?
विधायिका का इंस्टीच्यूशन मजबूत रहे, इसके लिए ये जरूरी है। हाल ही में इस पर विपक्ष की बात भी हुई थी। 42 विधायकों ने मुख्यमंत्री को एक दस्तावेज दिया था। इसमें और भी मसले थे, पर अफसरशाही हावी है। कहीं गोल कर दिया। इसमें ये भी तय हुआ था कि विधायक को तहसील स्तर पर दफ्तर मिलेगा, ताकि लोगों के काम वहीं निपट सकें। अब हुआ ये है कि जब से जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने हैं, सरकारी कार्यक्रमों को पार्टी के कार्यक्रमों में बदल दिया गया है। विपक्षी विधायक को निमंत्रण भी अनमने मन से दिया जाता है कि सच में ही न आ जाए। मेरे चुनाव क्षेत्र मेें सबसे लंबे पुल का उदघाटन हुआ, जिस पर हारे हुए व्यक्ति का नाम चढ़ा दिया। रोहडू दौरे में भी ऐसा ही किया। इनके साथ सांसद हर जगह रहते हैं, उनका नाम भी जोड़ दिया जा रहा है, जबकि स्कीम करवाई विधायक ने। ये सब सीएम ऑफिस से अप्रूव हो रहा है। मैंने इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। जवाब के इंतजार में हूं। विधानसभा में ये मसला उठाएंगे। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो कानूनी रास्ता भी लेंगे। कांग्रेस विधायक के अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट भी जाएगी।
सीमेंट रेट फिर से मुद्दा बने हैं। उद्योग मंत्री कह रहे हैं कि रेट कम करवाएंगे, लेकिन हुए नहीं। आप जब उद्योग मंत्री थे, तब भी ये मसला उठता रहा। क्या सरकार रेट करवा सकती है?
ये बड़ा वाजिब मुद्दा है। हमारे वक्त में भी ये विवाद उठते थे कि यहां बनने वाला सीमेंट पड़ोसी राज्यों में सस्ता और हिमाचल में महंगा क्यों? हमने सीमेंट कंपनियों से बात करके एक थंब रूल बनाया था कि प्रदेश के बार्डर जिलों में रेट पड़ोसी राज्यों के बराबर होगा। सीमेंट कंपनियां चालाकी करती है। इसी से तंग आकर हमारी सरकार ने जेपी का सीमेंट प्लांट रद किया। रिलायंस को चौपाल में दिए प्लांट में शर्त लगाई कि हिमाचल में सस्ता देना होगा। सुना है चंबा सीमेंट प्लांट के लिए अब ये शर्तें भी सरकार हटाने जा रही है। कंपनियां यहां ट्रांसपोर्टेशन को इसका जिम्मेदार बताती है, लेकिन इनकी सरकार में तो मेक इन इंडिया का नारा भी फेल हो गया। पाकिस्तान तक से सस्ता सीमेंट आकर बिक रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की तारीफ कर रहे हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू की निंदा। आपका क्या मत है?
देखिए, वीरभद्र सिंह कांग्रेस की शीर्ष नेता हैं। वह राज्य की राजनीति के सभी पदों को सुशोभित कर चुके हैं। वर्तमान में भी एमएलए हैं। वह जो भी बात करते हैं, उसके सभी राजनीतिक पहलुओं पर गौर करके ही करते हैं। उनकी पसंद नापसंद भी बहुत साफ है। मुझे उनकी सरकार में बतौर मंत्री काम करने का मौका मिला है। इसलिए उन पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
जब से रजनी पाटिल राज्य कांग्रेस प्रभारी बनी हैं, वीरभद्र सिंह को तो कांग्रेस के सम्मेलनों तक में नहीं बुलाया जा रहा। क्या लोकसभा चुनाव से पहले ये रणनीति सही है?
रजनी पाटिल जब से प्रभारी बनी हैं, वह पार्टी को गतिशील करने की पूरी कोशिश कर रही हैं। पूरा समय भी दे रही हैं। जहां तक वीरभद्र सिंह को न बुलाने का सवाल है तो ऐसा नहीं है। प्रभारी खुद उनके संपर्क में हैं और ये इन दोनों के बीच की बात है। वीरभद्र सिंह ने अपनी कुछ बातों पर स्टैंड लिया हुआ है। लेकिन पार्टी जानती है कि अब असली चुनौती भाजपा है। यदि लोकसभा चुनाव जीतना है तो हमें वीरभद्र सिंह को फोर फ्रंट पर लाना ही होगा। उनका प्रदेश के हर क्षेत्र में जनाधार है और ऐसी शख्सियत हैं, जिनसे हमेशा कुछ सीखने को मिलता है।
द्य पिछले विधानसभा चुनाव के बागियों की पार्टी में वापसी में कौन रोड़ा बना हुआ है? प्रभारी के कहने के बावजूद अब तक फैसला नहीं हुआ।
इस बारे में पार्टी स्तर पर डायलॉग हो गया है। ऐसे लोगों को श्रेणियों में भी बांट दिया गया है। अब इस बारे में फैसला हाईकमान को लेना है। प्रभारी के हस्तक्षेप से ही फार्मूला सेटल हुआ है। इसमें ये देखा जाएगा कि कौन पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा है और किस पर पार्टी के खिलाफ काम करने का आरोप है? ये भी संभव है कि कुछ लोगों की वापसी सशर्त हो।
ऐसा क्यों लगता है कि कांग्रेस में लोकसभा चुनाव से पहले ही अगले मुख्यमंत्री की जंग चल रही हो। कभी वीरभद्र सिंह प्रत्याशी घोषित कर रहे हैं, कभी सुक्खू। क्या आप भी सीएम रेस में हैं?
देखिए, मैं सिर्फ अपने बारे में कह सकता हूं। मैं किसी ओहदे की रेस में नहीं हूं। मुझे पार्टी ने विधायक दल का नेता बनाया है। चुने हुए विधायकों के हितों की लड़ाई लडूंगा और पार्टी हित में जो जरूरी होगा, वो करूंगा। अभी चार साल विधानसभा चुनाव को हैं। पार्टी को अगले चुनाव में सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने के लिए निष्काम भाव से काम करूंगा। कौन किसे प्रत्याशी घोषित कर रहा है, ये मसले हाईकमान के स्तर के हैं। इसमें मेरा हस्तक्षेप कतई वाजिब नहीं है। जहां तक वीरभद्र सिंह की बात है तो उन्होंने केवल अपनी राय दी है। टिकट तो संसदीय बोर्ड और राहुल गांधी तय करेंगे।
आपको क्या लगता है कि जो हालत अभी कांग्रेस के भीतर है, उससे लोकसभा चुनाव में आप चारों सीटें जीत सकते हैं?
मेरा मानना है कि पिछली बार मोदी लहर प्रबल थी। इस बार लहर पर कहर पड़ेगा। परिस्थितियां हमारे हक में है। यदि एक होकर महंगाई, बेरोजगारी, नोटबंदी और जीएसटी को मुद्दा बनाएं तो लोग साथ होंगे। पीएम मोदी ने देश को जुमलों के सिवा कुछ नहीं दिया। संवैधानिक संस्थाओं का नुकसान किया। इधर राज्य सरकार ने पहले बजट में ही 30 योजनाएं लांच कर दी। ये थी क्या? लोगों को पता तक नहीं है।
आप एनएच की घोषणा पर कई बार सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस को केंद्र सरकार की मंशा पर इतना संदेह क्यों है?
विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अचानक आते हैं और एक साथ 69 एनएच की घोषणा करते हैं जिन पर 65000 करोड़ खर्च होना था। सरकार बताए, इस एक साल में कितने पैसे दिल्ली से आए? क्या एक इंच नया एनएच बना? अब केंद्र सरकार को महज 4 महीने बचे हैं। इनमें यदि ये पैसा नहीं आया तो ये राज्य के लिए सबसे बड़ा धोखा होगा कि नहीं? प्रभावितों को चार गुणा मुआवजा देने की बात कही। अब तक दिया? नहीं। अब ये भी संभव है कि चुनाव से पहले कुछ और केंद्रीय मंत्री यहां प्रकट हों और करोड़ों की घोषणाएं कर जाएं। ये सरकार बनाने के लिए झूठ बोलते हैं, इसलिए संदेह होता है।
कांग्रेस मुख्यमंत्री के हवाई दौरों पर सवाल उठा रही है। भाजपा यही आरोप कांग्रेस सरकार पर लगाती थी। किसकी बात सही मानें?
मेरा मत है कि यदि हेलिकॉप्टर का प्रयोग कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए हो तो कुछ बुरा नहीं है। लेकिन यदि उडऩा शौक बन जाए तो क्या कह सकते हैं। अब तो ये शौक पूरे करने को दो-दो हेलिकॉप्टर लेने की तैयारी हो रही है। सड़कों की हालत खराब है। मुख्यमंत्री ने कह दिया कि 10 दिनों में गड्ढे भरे जाएंगे। लेकिन गड्ढे और बड़े हो गए। इससे लगता है कि इस प्रदेश में पानी और सड़कों के बाद अब उडऩे वाले मुख्यमंत्री की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सरकार के लोन पर कांग्रेस तंज कसती है। खुद आपकी सरकार ने भी यही राह पकड़ी थी। दोनों में अंतर क्या है?
हम सत्ता में थे तो कहते थे कि सरकार कर्ज लेकर घी पी रही है। अब औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत। जब से सत्ता में आए हैं, संसाधन बढ़ाए नहीं, नए नए बोर्ड निगम क्रिएट किए जा रहे हैं। एक साल में 3500 करोड़ लोन ले लिया। पर शाही शौक बदल नहीं रहे। दिल्ली जा रहे हैं पर मिला कुछ नहीं। 9000 करोड़ का दावा किया जा रहा है, लेकिन पैसे आए कितने? ये कोई नहीं बता रहा। ये हवाबाजी ज्यादा दिन काम
नहीं आएगी।
विधानसभा का शीतकालीन सत्र इसी महीने धर्मशाला में होगा। कांग्रेस की रणनीति सत्र के लिए क्या रहेगी? कौन से मुद्दे अहम हैं?
मुद्दे कई हैं, लेकिन मेरी चिंता कानून एवं व्यवस्था की स्थिति है। इस एक साल में 250 से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं। सरकार हद दर्जे की संवेदनहीनता दिखा रही है। गुडिय़ा कांड पर जो बवंडर मचा रहे थे, वे अब खामोश हैं। ड्रग्स का जाल प्रदेश के गांवों तक पहुंच गया है। हत्याओं की हर रोज खबर सुनने को मिलती है। प्रदेश में होशियार और गुडिय़ा हेल्पलाइन किसी काम नहीं आ रही, पर सरकार को कोई परवाह नहीं। और भी कई मुद्दे उठेंगे। विधायक दल में सब बातें होंगी।
बाबा रामदेव की लीज पर आपको इतनी आपत्ति क्यों है? आपकी सरकार भी तो जमीन लौटाने को तैयार थी?
मसला जमीन लौटाने का नहीं है। एक कमर्शियल कंपनी को लीज मनी में छूट देने का है। 96 बीघा जमीन 100 साल के लिए 2.40 करोड़ में कहां मिलती है। बाबा रामदेव शुद्ध व्यापारी हैं, इसलिए छूट देना अच्छी परंपरा नहीं। ऐसा ही फैसला ऊर्जा नीति में संशोधन कर लिया गया। यहां भी लीज मनी और अन्य राहतें देेकर राज्य के राजकोष को नुकसान पहुंचाया गया।
आप ये आरोप किस आधार पर लगाते हैं कि राज्य सरकार आरएसएस के दबाव में चल रही है?
मैं क्या, सबको इस बारे में पता है। खुद मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि संघ केवल सुझाव देता है और उनका सुझाव हमारे लिए आदेश है। मंत्री संघ के इशारों पर कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। संघ की संस्थाओं को सरकारी जमीन बांटने का सिलसिला शुरू हो गया है। कई जिलों में उपायुक्तों के पास आवेदन पहुंच गए हैं। नई नियुक्तियों में इसका असर दिख रहा है। और कितनेे प्रमाण चाहिए?

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