When will finally become the mini secretariat

लेटलतीफी : दो क्षेत्रों के लोगों की खींचातान के बीच लटका भवन निर्माण ,  2011 में तत्कालीन सीएम धूमल ने किया था शिलान्यास

हिमाचल दस्तक। बड़सर : मिनी सचिवालय का निर्माण लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मैहरेवासियों ने मिनी सचिवालय के निर्माण की कई बार मांग की, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो पाई। मैहरे में लोक निर्माण, आईपीएच, सब जज कोर्ट, विद्युत, तहसील, पुलिस विभाग के कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर हैं। एक छत के नीचे सरकारी कार्यालय न होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालत यह है कि एसडीएम कार्यालय पिछले कई वर्षों से बचत भवन में चल रहा है।

बताते चलें कि मिनी सचिवालय का शिलान्यास 15 अगस्त, 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने तहसील परिसर मैहरे में किया था। इसके लिए बकायदा बजट का प्रावधान भी किया था। शिलान्यास होने से जनता के अधिकतर कार्य एक छत के नीचे निपटने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बिडंवना यह है कि आठ वर्ष का लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद मिनी सचिवालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। कांग्रेस सरकार की सत्त्ता के दौरान मिनी सचिवालय के निर्माण में कोई प्रयास नहीं हो पाया।मिनी सचिवालय के निर्माण का मामला पहले कोर्ट में विचाराधीन था। इस कारण सचिवालय के निर्माण में देरी हुई है।

:मिनी सचिवालय का निर्माण होना प्रस्तावित है। मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार से मांग की जाएगी।:
-इंद्रदत लखनपाल विधायक बड़सर

“पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मैहरे में मिनी सचिवालय का शिलान्यास किया था। बजट का प्रावधान भी किया था। लेकिन कांग्रेस सरकार में सचिवालय का निर्माण कार्य ठंठे बस्ते में चला गया। स्थानीय विधायक ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।”
-बलदेव शर्मा, पूर्व विधायक बड़सर

ऐसे लटका काम

मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए पहले बड़सर में 12 कनाल भूमि का प्रावधान किया गया था, लेकिन मिनी सचिवालय के लिए यह भूमि रिजेक्ट होने से मामला लटक गया। उसके उपरांत मैहरे संघर्ष समिति के प्रयासों से तहसील परिसर में मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए 14 कनाल भूमि का प्रावधान करके इसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से करवाया गया।

लेकिन बड़सर बार एसोसिएशन व बड़सर के लोगों ने हाईकोर्ट शिमला में याचिका दायर कर दी कि मिनी सचिवालय का निर्माण बड़सर में ही होना चाहिए। यानी बड़सर व मैहरेवासियों की खिंचातान के चलते मिनी सचिवालय का अभी तक निर्माण नहीं हो पाया। इस खिंचातान के चलते अभी दूर-दूर तक मिनी सचिवालय का निर्माण होता नहीं दिख रहा है। मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए क्षेत्र के लोगों को अभ्ी तक और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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