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अब सुरेश चंदेल के जाने के बाद यह बात उठना लाजमी है कि प्रदेश में सरकार होने के बावजूद पार्टी के संगठन से जुड़ा हुआ व्यक्ति कैसे जड़ों से बाहर चला गया

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। ऊना
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्य अध्यक्ष व तीन बार के सांसद चंदेल का यूं कांग्रेस में शामिल होना कई भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी अखर रहा है, जबकि चंदेल लंबे समय से नाराजगी जता रहे थे। सवाल यह पूछा जा रहा है कि आखिर क्यों सुरेश चंदेल को मनाया नहीं जा सका? आखिर क्या चंदेल की शर्तेें थी जिन्हें भाजपा नहीं मान पाई।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद सुरेश चंदेल के बेटे ने सोशल मीडिया पर ऐसी ही पोस्ट डाली जिससे सवाल खड़े होते हैं कि आखिर भारतीय जनता पार्टी में कौन से ऐसे नेता हैं जो चाहते थे कि सुरेश चंदेल घर बैठ जाएं या उन्हें मान सम्मान न दिया जाए। क्योंकि सुरेश चंदेल के बेटे दिवेश चंदेल ने लिखा कि काश भारतीय जनता पार्टी के अहंकारी नेता इस बात को समझ पाते कि सुरेश चंदेल के लिए टिकट ही सब कुछ नहीं था… इसका मतलब यह है कि सुरेश चंदेल भारतीय जनता पार्टी में भी अपनी भूमिका ही तलाश कर रहे थे।

टिकट जैसी उनकी कोई मांग नहीं थी। वह सिर्फ सरकार या संगठन में अपनी एडजस्टमेंट को लेकर ही बात कर रहे थे, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि न तो सरकार में और न ही पार्टी में एडजस्ट किया गया और न ही ऐसा कोई ठोस आश्वासन मिला, जिससे सुरेश के कदम बाहर नहीं जाते। सुरेश चंदेल भी भाजपा के ही कुछ नेताओं पर दोष दे रहे हैं।

अब सुरेश चंदेल के जाने के बाद यह बात उठना लाजमी है कि प्रदेश में सरकार होने के बावजूद पार्टी के संगठन से जुड़ा हुआ व्यक्ति कैसे जड़ों से बाहर चला गया। नुकसान और फायदा तो बाद की बात है, लेकिन चंदेल के कांग्रेस में जाने से निश्चित रूप से भाजपा बैक फुट पर आएगी और कांग्रेस सुरेश चंदेल को आगे कर सियासी माहौल बनाने का प्रयास करेगी।

कौंडल, धीमान व रतन भी निशाने पर

सुरेश चंदेल के जाने के बाद कांग्रेस में सक्रियता बढ़ गई है और भाजपा सहित कुछ अन्य नेताओं के साथ भी वार्ताओं के दौरे चलने लगे हैं। माना जा रहा है कि कुछ नेताओं के साथ बड़े लंबे समय से कांग्रेस के नेता संपर्क में हैं और अब उस संपर्क को और बढ़ाया गया है, ताकि बात को लक्ष्य तक पहुंचाया जा सके। सूत्रों की मानें तो रिखी राम कौंडल, भोरंज से अनिल धीमान को कांग्रेस में लाने की बात गंभीरता से सोची जा रही है, तो वहीं ऊना से पूर्व विधायक ओपी रतन को भी कांग्रेस के साथ जोडऩे का क्रम चलाया जा सकता है।

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