prisoners ran away

एक ही बैरक में बंद 25 अन्य को क्या नहीं लगी थी भनक?

कंबलों की रस्सी बनाकर दीवार से उतर कर हुए रफूचक्कर

हिमाचल दस्तक ब्यूरो। शिमला
आदर्श कंडा जेल के बैरक नंबर 4 से फरार तीन कैदियों ने यहां बंद 25 कैदियों को भनक लगने नहीं दी। हैरानी की बात है कि एक ही बैरक में बंद 28 कैदियों में से तीन कैदी रात भर फरार होने की योजना बनाते रहे और अन्य कैदियों के सो जाने के बाद कैसे फरार हो गए? ये अहम सवाल हैं।

इस बैरक में बंद किसी भी कैदी को यह भनक नहीं लग पाई कि तीन कैदी लोहे काटने की ब्लेड से सलाखों को काट रहे हैं। आदर्श कंडा जेल से आधी रात को कैदी फरार होने को लेकर अब सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। जेलों में बंद कैदियों की रात की हरकतों को जेल प्रशासन द्वारा चेक नहीं किया जाता। इसके कारण कोई भी कैदी इस तरह की योजना बनाकर कभी भी फरार हो सकता है। जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर कई तरह के सवाल फरार हुए कैदियों ने खड़े कर दिए हैं।

कैदियों ने यहां से फरार होने के लिए लोहा काटने वाली ब्लेड का इंतजाम पहले ही कर लिया था

कंडा जेल की दीवारे 40 फुट से भी उंची है। ऐसे में कैदी कैसे फरार हुए और क्यों जेल प्रशासन द्वारा तैनात जेल वार्डनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। कंडा जेल से फरार होने वाले कैदी पहले ही अपना सामान बांध चुके थे। कैदियों ने अपने कपड़ों की एक गठरी को बांध रखा था, जिसे वह अपने साथ लेकर फरार हो रहे थे, लेकिन जैसे ही कैदी कंबल के रस्सी के सहारे दीवार फांद कर निचली मंजिल में पहुंचे तो वहां पर उनकी कपड़ों की गठरी भी छूट गई।

क्योंंकि यहां से आगे ये कैदी एक पाइप के सहारे नीचे उतर कर फरार हुए हैं। बताया गया कि तीनों नेपाली कैदियों ने यहां से फरार होने के लिए लोहा काटने वाली ब्लेड का इंतजाम पहले ही कर लिया था। ऐसे में जेल प्रशासन द्वारा ड्यूटी पर लगाए गए वार्डनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कैदियों के पास लोहा काटने वाली ब्लेड कैसे पहुंचा?

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