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Win the hearts of the people, the elections will win

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अब पूरी तरह से स्थापित हो चुके हैं। लोकसभा चुनावों में पूरे उत्साह से लबरेज जयराम की बातों से स्पष्ट होता है कि वे किसी को भी कोई ‘खुराफात’ करने का मौका  नहीं देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वे नए भारत का पर्याय मानते हैं।

‘हिमाचल दस्तक’ के उदयबीर पठानिया से लोकसभा चुनाव के अलावा दूसरे मसलों पर भी खुल कर बात हुई। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार में परफॉर्मेंस के हिसाब से सभी का भविष्य तय होगा।

  •  लोकसभा चुनाव प्रचार चरम पर है। चारों सीटों पर अभूतपूर्व हलचल को किस नजर से देखते हैं?

विधानसभा चुनावों में भी प्रचंड बहुमत मिला था, इस दफा भी चार बटा चार होगा। मेरा यह विश्वास है कि हम चारों सीटें तो जीतेंगे ही, साथ में जीत का अंतर भी रिकॉर्ड तोड़ रहेगा।

  •  इतना भरोसा कैसे? अभी तो आपकी सरकार बहुत पुरानी नहीं है…

भरोसा संगठन की शक्ति और राष्ट्रीय नेतृत्व से बनता है। हमारे गाइड ऐसे हैं कि दुनिया उनका लोहा मानती है। हमारे तो कार्यकर्ता सम्मेलन ही हजारों की तादाद में होते हैं। पन्ना प्रमुख सम्मेलन ही उदाहरण हैं। हमारी लीडरशिप ही देख लीजिए। राष्ट्रीय स्तर पर मोदी जी के साथ देश खड़ा है तो प्रदेश स्तर पर भी हालात अलग नहीं हैं। शांता जी चुनाव नहीं लड़ रहे, पर लड़वा रहे हैं। धूमल साहब भी मैदान में डटे हुए हैं। नड्डा जी भी जौहर दिखा रहे हैं।

  •  इसके अलावा कुछ खास… 

( जोर से ठहाका लगाते हुए) खास क्या है? यह न पूछिये, यह पूछिये कि खास क्या नहीं है? जो-जो कांग्रेस में मिसिंग है, महागठबंधन में गायब है, वो सब भाजपा में है। हमारे पास नरेंद्र मोदी जैसी मजबूत लीडरशिप है, संगठन है। सारी दुनिया हम में नया भारत देख रही है।

  •  तो आप यह कह रहे हैं कि कांग्रेस फेल है?

मैं ही क्यों? सारी दुनिया बोल रही है। शुरुआती दौर से ही यह लोग तो चुनाव लडऩे नहीं, बल्कि चुनाव से भागने में लगे हुए हैं।

  •  लेकिन कांग्रेस में तो टिकट के लिए जंग तक हो गई थी…

बिलकुल, जंग हुई थी। पर यह जंग टिकट खुद लेने के लिए नहीं, बल्कि जबरन दूसरों को देने के लिए हुई थी। कांग्रेसी शुरू से ही यह मान चुके हैं कि जब चुनाव हार ही जाना है तो लडऩा क्यों? खबरों को आप लोग ही सामने लाते हैं। कांगड़ा में ही देख लीजिए। पहले सुधीर शर्मा का नाम आया। शर्मा ने खुद यह संदेश प्रचारित करवा दिया कि वह चुनाव लड़ रहे हैं। बाद में जब एहसास हुआ कि हार तय है तो मना कर दिया। भाई साहब, यह वो हकीकतें हैं, जिन्हें जयराम ही नहीं, दुनिया भी जानती है।

  • फिर पुराने सवाल पर आते हैं। आपकी सरकार किस तरह से इतनी फिट है कि हर हाल में इसका नतीजों में हिट होना आप तय मान रहे हैं?

मैंने बीते सवा साल में जनता के साथ हर स्तर तक पहुंच और प्यार बनाया है। एक भी हलका ऐसा नहीं है, जहां कोई यह कह सके कि मैंने सीएम को नहीं देखा है। जो काम जनता ने बताए हैं, वह तमाम किए हैं। अगर कोई अभी नहीं हो पाया है तो यह तकनीकी वजहों से रुका हुआ होगा। मानवीय स्तर पर कोई कमी नहीं रखी गई है।

  • आप यह कहना चाहते हैं कि सब राम भली है?

राम भली भी है और सरकारें भी भली हैं। केंद्र में भी और प्रदेश में भी,  विपक्ष सिर्फ शोर मचाने के लिए शोर कर रहा है। एक भी मुद्दा ऐसा बता दीजिए, जिसका कोई आधार हो?

मोदी के वर्किंग स्टाइल से कांग्रेस हाशिये पर

  •  क्या यह माना जाए कि भाजपा हर हाल में विजयी है?

भाजपा इसलिए विजयी है कि यह आम आदमी की जय और विजय को सुनिश्चित करती है। मोदी जी उज्ज्वला योजना लेकर आए तो उनके ही आशीर्वाद से हम दो कदम आगे जाकर गृहिणी योजना से महिलाओं को मजबूत कर सके। आयुष्मान योजना में प्रदेश के 22 लाख घरों को लाभ पहुंचा तो एक बार फिर हम मोदी सरकार के सहयोग से कुल 70 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने में आगे बढ़े। हमने जनता का दिल जीता है, तो जीत सुनिश्चित है।

  • मतलब आप कांग्रेस को हमला करने के लायक भी नहीं मानते?

( हल्के से मुस्कराते हुए) मैं तो वैसे भी इनके लिए ज्यादा नहीं बोलता। बोलना भी क्यों? मोदी जी ने अपने वर्किंग स्टाइल से कांग्रेस को हाशिये से भी बाहर कर दिया है। इस बार कांग्रेस अपने अस्तित्व की बजाय गांधी परिवार के अस्तित्व के लिए लड़ रही है। मजबूरी की इंतहा देखिए, प्रियंका गांधी तक को मैदान में उतार दिया है।

  •  पर कांग्रेस भी इस बार भाजपा के चूल्हे को ठंडा करने के लिए ताकत झोंके हुए है…

जिस कांग्रेस के अपने चूल्हे की राख तक ठंडी हो चुकी है, वह उस मोहब्बत की गर्माहट को क्या ठंडा करेगी, जो आम आदमी के भीतर भाजपा के लिए बनी हुई है। इस बार के नतीजे देश को हमेशा के लिए कांग्रेस मुक्त तो कांग्रेस को गांधी परिवार मुक्त कर देंगे।

अहम-वहम कोई न रखें परफॉर्मेंस देखी जाएगी

  • तो यह तय है कि अब जो जयराम सामने आए हैं वह आईना दिखाने में कोई कोर-कसर बाकि नहीं रखेंगे?

मेरा शुरू से यह स्वभाव और प्रोफाइल रहा है कि मैं सबकी सुनता हूं और सबका काम करने को तरजीह देता आया हूं। सबके साथ चलने का स्वभाव रहा है। सवा साल से हर आईने में हर अक्स को देख रहा हूं। नोट भी कर रहा हूं।

  • यह मान लिया जाए कि लोकसभा चुनाव में लीड के लिहाज से सरकार में बहुत कुछ नया होगा?

बिलकुल, कोई शक नहीं। परफॉर्मेंस का बहुत बड़ा रोल होगा। अब बड़े और कड़े फैसले लेने का काम शुरू होगा। आई एम कंप्लीटली इस्टेब्लिशेड नॉओ…

  • सीधा सवाल, मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा या विभागों में?

मैंने कहा न, अब वक्त बड़े फैसले लेने का है। मुझे लगता है कि चुनावों के बाद री-शफलिंग होगी। मंत्रियों के काम-काज को बड़ी बारीकी और नजदीकी से परखा है। आई कैन इजिली मेक इट, व्हाट इज द बेस्ट…

  • आधार क्या इलेक्शन की परफॉर्मेंस ही रहेगा?

बहुआयामी प्रदर्शन को कसौटी पर परख रहा हूं। विभागीय प्रदर्शन भी उतना ही अहम है, जितना चुनावी प्रदर्शन। अहम-वहम तो कोई न रखे।

चुनाव के बाद लेंगे फैसला

आखिरी सवाल, क्या प्रशासनिक ट्रिब्यूनल सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है, जो अब इसको हटाने की खबरें आनी शुरू हो गई हैं?
मेरा यह मानना है कि जो भी हो, हर वर्ग के भले के लिए हो। यह वैसे भी संवैधानिक संस्थान है। पहले भी
हटाया गया था। चुनाव के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।

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