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बी. टेक, एम. टेक और MBA कर चुके छात्र हो रहे मायूस

  • लगाया आरोप राजनीतिक पहुंच वालों को दी जा रही तरजीह
  • कहा, बी. टेक और एमबीए को मजदूरों की भांति दिया जा रहा वेतन

ऊमा धीमान। बद्दी
औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन को रोजगार की एक सुनहरी नगरी माना जाता है। हर रोज आंखों में सपने लेकर हजारों की संख्या में लोग रोजगार की तलाश में बीबीएन का रुख करते हैं, लेकिन उसी बीबीएन के अपने क्षेत्रीय युवाओं को नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
बीबीएन में एक अच्छी नौकरी पाने के लिए युवाओं की शिक्षा, डिग्री या उनकी योग्यता से ज्यादा सिफारिश की जरूरत पड़ रही है।

बी. टेक, एम. टेक व एमबीए कर चुके भूपेंद्र सिंह, शेर सिंह, संजीव कुमार, अनिल कुमार, जितेंद्र सिंह, अमृत पाल, राजेश कुमार, परीक्षित सूद व गुरबख्श ङ्क्षसह ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से नौकरी की तलाश में अपने ही बीबीएन के उद्योगों में ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन किसी भी उद्योग में उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं दिया जा रहा। युवाओं का कहना है कि अधिकतर उद्योगों में राजनीतिक पहुंच के कारण युवाओं को नौकरी पर रखा जाता है।

उनका कहना है कि मजदूरों की तरह उनका भी शोषण किया जा रहा है

हताश युवाओं का कहना है कि उद्योगों में अब नौकरी पाने के लिए शिक्षा व योग्यता की जरूरत नहीं रही बल्की जिसकी जितनी ऊंची राजनीतिक पहुंच होगी उसे उतनी जल्दी बीबीएन के उद्योगों में नौकरी मिलेगी। युवाओं का कहना है कि सरकार द्वारा यह बात कही गई थी कि बीबीएन के उद्योगों में 70 प्रतिशत हिमाचली युवाओं को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन यहां पर बाहरी राज्यों के लोगों को नौकरी जल्दी ही मिल जाती है।

पीडि़त युवाओं ने बताया कि अगर उद्योगों में किसी युवा को नौकरी मिल भी जाती है तो उसकी योग्यता के अनुसार न तो उसे नौकरी दी जाती है और न ही वेतन दिया जा रहा है। उनका कहना है कि मजदूरों की तरह उनका भी शोषण किया जा रहा है। बी. टेक और एमबीए को मजदूरों की भांति सात व आठ हजार वेतन दिया जा रहा है, जिससे उनके परिवार का तो दूर उनका अपना गुजारा भी करना कठिन है।

हताश होकर पकड़ रहे गुंडागर्दी और नशे की राह

बीबीएन में राजनीतिक सिफारिशों के चलते क्षेत्र के युवाओं में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। इसके चलते क्षेत्र के युवा गुंडागर्दी व नशे के व्यापारियों के आसानी से शिकार होते जा रहे है। बीबीएन में दिन-प्रतिदिन बढ़ती राजनीतिक सिफारिशों के चलते व उद्योगों की मनमानियों के चलते बीबीएन के युवाओं व उनके परिवारों का भविष्य अंधेरे की ओर बढ़ता जा रहा है। आए दिन बीबीएन में लूटपाट व मारपीट के मामले समाने आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी व योग्यता अनुसार नौकरी न मिलना है। हताश होकर कई युवा गलत संगत में चले जा रहे हैं और नशे के व्यापारियों का आसान शिकार बन रहे है।

बीबीएन में किसी के साथ मतभेद नहीं किया जा रहा है। प्रतिस्पर्धा के युग मेें युवाओं में अगर टेलेंट होगा तो उसे कोई रोक नहीं सकता। युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी दी जा रही है। -शैलेश अग्रवाल, अध्यक्ष, बीबीएनआईए

बीबीएन के सभी औद्योगिक घराने पूरी तरह से सत्ताधारियों के अधीन चलते है। सत्ताधारियों की सिफारिश पर ही उद्योगों में युवाओं को रोजगार दिया जाता है। इन सत्ताधारियों के चलते ही आज क्षेत्र के हजारों होनहार व काबिल युवाओं को रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। -बबलू पंडित, कामगार नेता

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