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Amazing man Soichiro Honda दिवालिया होने के बाद भी हार नहीं मानी

Soichiro Honda एक ऐसे Amazing man जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बिलकुल दिवालिया हो जाने के बाद भी हार नहीं मानी। द्वितीय विश्व युद्ध मे उसकी फैक्टरी तबाह हो गई, सारी पूंजी खत्म हो गई। फिर भी उसने हार नहीं मानी। किसी तरह उसने ऑटो पार्ट्स का प्लांट खोला परंतु दुर्भाग्यवश भूकंप ने पार्ट्स के उस प्लांट को भी नष्ट कर दिया।

मैं भाग्य को नहीं मानता, केवल मेहनत और कर्म में विश्वास करता हूं

एक दिन उसके मित्र सांत्वना देने के लिए उसके पास बैठे थे। एक मित्र बोला कि Soichiro, लगता है तुम्हारा भाग्य ही खराब है। जहां भी हाथ डालते हो, असफलता ही हाथ लगती है। मेरी मानो तो अपने भाग्य को मनाओ। मित्रों की बात सुनकर वह अपने उस मित्र के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला कि दोस्त, मैं भाग्य को नहीं मानता, केवल मेहनत और कर्म में विश्वास करता हूं। अभी भी मैंने कुछ खोया नहीं है, बल्कि अब तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं कुछ ऐसा करने वाला हूं जिससे पूरी दुनिया में तहलका मचने वाला है।

बेकार इंजन साइकिल में लगाकर बना डाली मोटरसाइकिल

Soichiro की बात सुनकर मित्रों को लगा कि असफलता व दिवालिएपन ने उसे पागल बना दिया है। वे उसके पास से उठकर चले गए। इसके बाद Soichiro ने एक बेकार जीआई इंजन लिया और उसे अपनी साइकिल में लगाकर मोटरसाइकिल बना डाली। कुछ दिनों बाद उसके एक मित्र ने इस मोटरसाइकिल को देखा और उससे अपने लिए भी ऐसी ही एक मोटरसाइकिल बनाने के लिए कहा। फिर एक और मित्र, फिर एक और मित्र, इस तरह यह सिलसिला चल पड़ा। धीरे-धीरे Soichiro का काम चल निकला।

पत्नी के गहने बेचकर खरीदे स्पेयर पार्ट्स

उसने 1948 में जब अपनी पहली फैक्टरी खोली तो उसके पास पार्ट्स खरीदने तक के लिए रुपए नहीं थे। अपनी पत्नी के गहने बेचकर उसने स्पेयर पार्ट्स खरीदे। आखिरकार Soichiro Honda की कठिन मेहनत एवं उनकी पत्नी का त्याग सफल हुआ और उनके द्वारा शुरू की गई कंपनी होंडा दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कंपनियों में गिनी जाने लगी।

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