News Flash
CAG report on Rafael will be put in Parliament today

महालेखा परीक्षक ने राष्ट्रपति को भेजी

नई दिल्ली : राजनीतिक विवाद का केंद्र बने राफेल जेट विमान सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रपट को सरकार मंगलवार को संसद में रखेगी।

राफेल डील पर लगातार कांग्रेस द्वारा सरकार पर आरोपों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है। विपक्ष राफेल डील पर कैग की रिपोर्ट को संसद में रखे जाने का इंतजार कर रहा है। मीडियो रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को ही कैग ने राफेल डील पर तैयार अपनी रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन भेजा है। कैग अपनी रिपोर्ट की एक प्रतिलिपि राष्ट्रपति के पास और दूसरी वित्त मंत्रालय के पास भेजता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फ्रांसीसी कंपनी से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के इस सौदे में कथित घोटाले एवं गड़बड़ी को लेकर सत्तासीन भाजपा और विशेषतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर बने हुए हैं। सत्तारूढ़ दल ने शेष ञ्च पेज १3

12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया है कि कैग ने राफेल पर 12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर विस्तृत जवाब और संबंधित रिपोर्ट कैग को सौंपी थी, जिसमें खरीद प्रक्रिया की अहम जानकारी के साथ 36 राफेल की कीमतें भी बताई गईं थीं। प्रोटोकॉल के तहत कैग ने इस रिपोर्ट को राष्ट्रपति के पास भेजा है। अब इस रिपोर्ट को लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और राज्यसभा चेयरमैन के ऑफिस को भेजी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट को लोकसभा और राज्यसभा में रखा जा सकता है।

राफेल सौदे की जेपीसी जांच आवश्यक: कांग्रेस

नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने से जुड़े अहम प्रावधानों को हटाने का दावा करने वाली खबर की पृष्टभूमि में कांग्रेस ने इस सौदे में धन की लेन-देन होने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच आवश्यक है।

इन आरोपों को खारिज किया है। सूत्रों ने कहा कि सरकार इस सौदे पर कैग की रपट मंगलवार को संसद के पटल पर रखेगी। मौजूदा 16वीं लोकसभा का वर्तमान सत्र बुधवार को समाप्त हो रहा है और यह संभवत: इसका आखिरी सत्र है। अप्रैल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोक सभा का गठन होगा। कैग की रपट को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कुछ सवाल उठाए। उन्होंने इस मामले में हितों के टकराव की बात उठाई है।

सिब्बल ने कहा है कि मौजूदा कैग राजीव महर्षि सौदे के समय वित्त सचिव थे और इस सौदे से जुड़े थे ऐसे में उन्हें इसकी ऑडिट से अपने को अलग कर लेना चाहिए। हालांकि केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सिब्बल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर कांग्रेस कैग जैसे संस्थान पर कलंक लगा रही है।जेटली ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर संस्थानों को नुकसान पहुंचाने वाले कैग जैसे संस्थान पर हमला कर रहे हैं। सरकार में 10 साल तक रहने के बाद भी संप्रग के मंत्री यह नहीं जानते कि वित्त सचिव ऐसा पद है जो वित्त मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ सचिव को दिया जाता है।

सिब्बल ने कहा कि महर्षि 24 अक्टूबर 2014 से 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव थे। इसी बीच में प्रधानमंत्री मोदी 10 अप्रैल 2015 को पेरिस गए और राफेल सौदे पर हस्ताक्षर की घोषणा की। सिब्बल ने कहा, वित्त मंत्रालय ने इस सौदे की बातचीत में अहम भूमिका निभाई। अब यह साफ है कि राफेल सौदा राजीव महर्षि के की निगरानी में हुआ। अब वह कैग के पद पर हैं। हमने उनसे दो बार मुलाकात की 19 सितंबर और चार अक्तूूबर 2018 को। हमने उनसे कहा कि इस सौदे की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है। लेकिन वह खुद के खिलाफ कैसे जांच शुरू कर सकते हैं।

This is Rising!

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams