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ईवीएम-वीवीपैट विवाद बैठक कर चुनाव आयोग के पास पहुंचे विपक्षी दलों के नेता

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ईवीएम एवं वीवीपीएटी के मुद्दे पर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने मंगलवार को चुनाव आयोग का रुख किया और उससे यह आग्रह किया कि मतगणना से पहले वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए।

विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि अगर किसी एक बूथ पर भी वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान सही नहीं पाया जाता तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र में सभी वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती की जाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं कहा, हमनें मांग की है कि वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान पहले किया जाए और फिर मतगणना की जाए। विपक्षी नेताओ ने कई स्थानों पर स्ट्रांगरूम से ईवीएम के कथित स्थानांतरण से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग की।

इससे पहले विपक्षी नेताओं ने कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक की। विपक्षी नेताओं की बैठक में कांग्रेस से अहमद पटेल, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद और अभिषेक मनु सिंघवी, माकपा से सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओब्रायन, तेदेपा से चंद्रबाबू नायडू, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल और कई अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए।

संदेह से परे होना चाहिए जनादेश

ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों पर बोले प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स के बाद विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से कथिततौर पर छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। मंगलवार को दिल्ली में 19 विपक्षी दलों ने ईवीएम के मुद्दे पर बैठक कर चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की। आशंका और आरोपों से भरे इस माहौल के बीच अब पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मतदाताओं के फैसले से कथित छेड़छाड़ की रिपोर्टों पर चिंता जताई है।

एक बयान जारी कर उन्होंने कहा कि ईवीएम, जो सीईआई की कस्टडी में हैं, उनकी रक्षा और सुरक्षा आयोग की जिम्मेदारी है। प्रणव मुखर्जी ने आगे कहा कि ऐसी अटकलबाजियों के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता, जो हमारे लोकतंत्र के मूल आधार को चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा कि जनादेश पवित्र है और इसे हर प्रकार के संदेह से परे होना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अपने संस्थानों पर दृढ़ विश्वास के साथ यह मेरी राय है कि काम करने वाले लोग ही हैं, जो फैसला करते हैं कि संस्थागत टूल्स कैसे परफॉर्म करें। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में संस्थागत अखंडता को सुनिश्चित करने का दायित्व भारतीय निर्वाचन आयोग पर है। उनके लिए ऐसा करना और सभी आशंकाओं को खत्म करना जरूरी है।

सभी आंकड़ों के मिलान की मांग वाली याचिका खारिज

सुप्रीमकोर्ट का सुनवाई करने से इनकार संदेह से…

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देश में हुए आम चुनावों के लिए 23 मई को होने वाली मतों की गिनती के दौरान वीवीपैट मशीनों की पर्ची का इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के आंकड़ों के साथ शत-प्रतिशत मिलान करने की मांग वाली जनहित याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अरूण मिश्र की अगुआई वाली अवकाश पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। यह याचिका चेन्नई के एक गैर सरकारी संगठन टेक फार आल की ओर से दायर की गई थी।

अवकाश पीठ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली अदालत की वृहद पीठ इस मामले में सुनवाई कर आदेश पारित कर चुकी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश इस मामले का निस्तारण कर चुके हैं। न्यायमूर्ति मिश्र ने कहा कि हम प्रधान न्यायाधीश के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते हैं…..यह बकवास है। यह याचिका खारिज की जाती है। इससे पहले सात मई को शीर्ष अदालत ने 21 विपक्षी दलों की ओर से दायर समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अगुआई में विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका में वीवीपैट पर्चियों के साथ ईवीएम के आंकड़ों का मिलान बढ़ा कर 50 फीसदी किए जाने की मांग की गई थी।

 

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