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Not necessarily think the members of the Commission alike

मोदी-शाह को क्लीनचिट पर रार , सीईसी ने चुनाव आयुक्त लवासा को दिया जवाब , 21 को होगी चुनाव आयोग की बैठक

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बीच ही चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद की खबरों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है कि यह जरूरी नहीं कि आयोग के सभी सदस्य एक जैसा ही सोचे।

विवाद के केंद्र में पीएम मोदी और अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में आयोग से क्लीन चिट दिया जाना है। बयान में कहा गया है कि मीडिया के कुछ हिस्सों में आचार संहिता के संदर्भ में चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर एक ऐसे विवाद का जिक्र किया गया है, जिसे टाला जा सकता था। मुख्य चुनाव आयुक्त अरोड़ा ने यह भी कहा कि उन्हें सार्वजनिक बहस से कभी गुरेज नहीं रहा, लेकिन हर चीज का एक समय होता है। दरअसल, कुछ मीडिया रिपोट्र्स में बताया गया है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को एक खत लिखा है।

लवासा में खत में मांग की है कि 3 सदस्यीय आयोग में अगर किसी मुद्दे पर किसी सदस्य का विचार अलग है, तो संबंधित आदेश में बाकायदा उसका भी जिक्र हो। लवासा चाहते हैं कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बेंच के जजों के अलग-अलग विचारों का स्पष्ट जिक्र होता है, वैसा ही चुनाव आयोग के मामले में भी हो।

बता दें कि अशोक लवासा ने पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों पर क्लीन चिट को लेकर बाकी 2 सदस्यों की राय से असहमत थे। वह चाहते हैं कि उनकी असहमति को भी रिकॉर्ड में लिया जाए। मीडिया रिपोट्र्स में बताया गया है कि लवासा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे खत में यह भी कहा है कि उनकी मांग के हिसाब से व्यवस्था बनने

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