Supreme-court

प्रदूषण पर अंकुश पाने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता

Supreme court ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री के लिए स्थाई लाइसेंस निलंबित करने का अपना आदेश आज अस्थाई रूप से यह कहते हुए वापस ले लिया कि पूरी तरह से प्रतिबंध एक कठोरतम कदम होगा। न्यायालय ने कहा कि पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश पाने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता है।

अध्ययन के लिए एक समिति भी की गठित

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की दो  सदस्या पीठ ने कहा कि पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के उसके आदेश पर दीवाली के बाद समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है लेकिन यह त्यौहार के बाद वायु की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। न्यायालय ने आने वाले त्यौहारों के दौरान पटाखे चलाने से दिल्ली वासियों के स्वास्थ्य पर पडने वाले असर के अध्ययन के लिए एक समिति भी गठित की है।

अस्थाई लाइसेंसों की संख्या 50 प्रतिशत कम करने का आदेश

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली इस समिति को दशहरा और दीवाली के त्यौहार के मौसम में जनता के स्वास्थ्य पर इन पटाखों के प्रभाव का अध्ययन करके 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपनी है। इसके अलावा, न्यायालय ने पुलिस को भी निर्देश दिया है कि 2016 की तुलना में इस साल पटाखों की बिक्री के लिए अस्थाई लाइसेंसों की संख्या 50 प्रतिशत कम कर दी जाए। इनकी अधिकतम सीमा 500 निर्धारित की गई है।

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