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Three Divorce Bill Presented in the Lok Sabha

विपक्ष ने किया विरोध : कानून मंत्री बोले, जनता ने हमें कानून बनाने के लिए भेजा है , कहा, यह नारी न्याय का सवाल है धर्म का नहीं

नई दिल्ली  :  नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देने की प्रथा को समाप्त करने से संबंधित विवादास्पद विधेयक को शुक्रवार को लोकसभा में अपने पहले विधेयक के रूप में पेश किया। विपक्ष के भारी विरोध के बीच सदन ने विधेयक को 74 के मुकाबले 186 मतों के समर्थन से पेश करने की अनुमति दी।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पेश करते हुए कहा कि विधेयक पिछली लोकसभा में पारित हो चुका है लेकिन सोलहवीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के कारण और राज्यसभा में लंबित रहने के कारण यह निष्प्रभावी हो गया। इसलिए सरकार इसे दोबारा इस सदन में लेकर आई है। उन्होंने विधेयकको लेकर विपक्ष के कुछ सदस्यों की आपत्ति को सिरे से दरकिनार करते हुए संविधान के मूलभूत अधिकारों का हवाला दिया जिसमें महिलाओं और बच्चों के साथ किसी भी तरह से भेदभाव का निषेध किया गया है। विपक्षी सदस्य इसे एक समुदाय पर केंद्रित और संविधान का उल्लंघन करने वाला बता रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि जनता ने हमें कानून बनाने भेजा है। कानून पर बहस और व्याख्या का काम अदालत में होता है। संसद को अदालत नहीं बनने देना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय का सवाल है, धर्म का नहीं। प्रसाद ने सवाल किया कि जब उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद भी मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के चलन से पीडि़त हैं तो क्या संसद को इस पर विचार नहीं करना चाहिए? उन्होंने कहा कि 2017 से तीन तलाक के 543 मामले विभिन्न स्रोतों से सामने आए हैं जिनमें 229 से अधिक उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद आए। इसलिए कानून बनाना जरूरी है।

इस बीच लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने विधेयक पेश किए जाने के दौरान सदस्यों की आपसी बातचीत को सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि सदन प्रक्रियाओं से चलता है। इसकी मर्यादा बनाए रखना हम सबका दायित्व है। सदस्यों को एक-दूसरे के पास जाकर चर्चा नहीं करनी चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमें लगता था कि चुनाव के बाद विपक्ष इस विधेयक की जरूरत को समझेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे पहले विपक्ष ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया, जिसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अभी मंत्री केवल विधेयक पेश करने की अनुमति मांग रहे हैं। आपत्तियां उसके बाद दर्ज कराई जा सकती हैं।

लोकसभा में पेपर स्लिप से वोटिंग

स्पीकर ओम बिड़ला ने बिल पेश करने को लेकर विपक्ष की आपत्ति पर पेपर स्लिप से वोटिंग कराई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अभी नए सांसदों को डिविजन नंबर आवंटित नहीं हुआ है, इसलिए वे मतविभाजन के लिए वोटिंग मशीन का इस्तेमाल नहीं कर पाए। इससे पहले केरल के कोल्लम से सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने सबरीमाला मंदिर विवाद पर लोकसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया।

3 साल कारवास का है प्रावधान:

इस विधेयक के तहत मुस्लिम महिलाओं को एक बार में तीन तलाक कहकर वैवाहिक संबंध समाप्त करना गैरकानूनी होगा। विधेयक में ऐसा करने वाले पति के लिए तीन साल के कारावास की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है।

हम 3 तलाक के खिलाफ, लेकिन…:

कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि हम तीन तलाक के खिलाफ हैं लेकिन इस विधेयक की विषयवस्तु से इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी क्यों?

नई दिल्ली। हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि यह संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन है। उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार को मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी है तो केरल की हिंदू महिलाओं से मोहब्बत क्यों नहीं? आखिर सबरीमाला पर आपका रुख क्या है?

 

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