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Women’s Day

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्या है, कैसे हुई शुरुआत, कब और क्यों मनाया जाता है?

एक औरत, एक माँ, एक पत्नी, एक बहन, एक बेटी के रूप में जाने वाली वह शख्सियत जिसको एक औरत कहा जाता है। जिसको हिन्दू शास्त्रों में देवी के समान पूजा जाता है। कहते है क्योंकि “भगवान हर जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने एक स्त्री को बनाया” है और उसका हृदय मक्खन की तरह कोमल बनाया। उसे प्रेम-भाव से भरी हुई दया की मूर्ति बनाया है। जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है ऐसा कहा जाता है । एक स्त्री अपने जीवन में कई तरह की भूमिकाएं निभाती है। एक स्त्री के बिना घर अधूरा होता है। एक स्त्री के बिना संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है ।

स्त्री की भागेदारी

हर युग में स्त्री ने अपनी अलग-अलग छाप छोड़ी है। चाहे वो कोई भी सदी क्यों न हो, उसने हर तरह से पुरुष का साथ दिया है। और आज 21वीं सदी की स्त्री ने तो वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर हर काम को बड़ी निपुणता के साथ कर रही है। जबकि एक स्त्री और भी कई तरह की ज़िम्मेवारिओं से घिरी हुई है। परंतु जिस समाज में स्त्री का सम्मान नहीं होता ऐसा समाज कभी उन्नति नहीं कर सकता। जो समाज स्त्री और पुरुष में भेद करता है वह कभी उन्नत नही हो सकता।

हर समय हमारी सेवाओं में व्यस्त रहने वाली स्त्री सम्मान की पात्र है। हमें एक स्त्री के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। और उसकी अपने जीवन में कीमत समझनी चाहिए। आइए जाने महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Women’s Day: देश की अलग-अलग जेलों में बंद महिला कैदियों को सम्मान

महिला दिवस क्या है, कैसे हुई शुरुआत,

International Women’s Day या अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह विशेष दिन अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं का सम्मान करने और उनकी उपलब्धियों का उत्सव मनाने का दिन है। सबसे पहले ये दिन अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर 28 फ़रवरी 1909 को मनाया गया था। बाद में इसे फरवरी के आखिरी रविवार को मनाया जाने लगा। शायद आपको जान कर आश्चर्य हो कि पहले अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था।

उन्हें ये अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया। इस दिवस की महत्ता तब और भी बढ़ गयी जब 1917 में फरवरी के आखिरी रविवार को रूस में महिलाओं ने bead and peace के लिए एक आन्दोलन छेड़ दिया जो धीरे-धीरे बढ़ता गया और ज़ार को रूस की सत्ता छोड़नी पड़ी। इसके बाद जो अंतरिम सरकार बनी उसने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दे दिया।

रुस में जब ये आन्दोलन शुरू हुआ था तब वहां जुलियन कैलेण्डर चलता था (अब ग्रेगेरियन कैलेण्डर प्रयोग होता है) जिसके मुताबिक़ फरवरी का आखिरी रविवार को 23 तारीख थी जबकि बाकी दुनिया में उस समय भी ग्रेगेरियन कैलेंडर चलता था और उसके मुताबिक़ रूस की तेईस फरवरी बाकी दुनिया की आठ मार्च थी इसीलिए 8 March को इंटरनेशनल विमेंस डे के रूप में मनाया जाने लगा।

एनी बेसंन्ट ने कहा है कि-

स्त्रियाँ ही हैं, जो लोगों की अच्छी सेवा कर सकती हैं, दूसरों की भरपूर मदद कर सकती हैं। जिंदगी से अच्छी तरह प्यार कर सकती हैं और मृत्यु को गरिमा प्रदान कर सकती हैं।

हर समय हमारी सेवाओं में तत्पर रहने वाली स्त्रियाँ सचमुच सम्मान की पात्र है। अगर आपके जीवन में स्त्रियों को लेकर सम्मान है तो आप कभी भी किसी मुश्किल में नहीं पड़ सकते। एक स्त्री के प्रति मन में सम्मान रखिए। एक पुरुष को चाहिए, की स्त्रियों के प्रति वह अपनी ऐसी छवि बना लें कि अकेले में एक पुरुष को देख कर स्त्री डरने के बजाये अपने को सुरक्षित महसूस करे।

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