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एंटीबायोटिक्स रिएक्शंस

कभी-कभी ऐसा समय आता है जब आपको एंटीबायोटिक्स का सेवन करना आवश्यक हो जाता है। जहां ये आपकी बीमारी ठीक करते हैं वहीं इनके कारण आपको कई साइड इफेक्ट्स जैसे पेट फूलना, डकार, गैस, कब्ज और डायरिया आदि भी हो सकते हैं। जैसा कि नाम से ही पता चलता है एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारते हैं। दुर्भाग्य से ये अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

एंटीबायोटिक्स लेने के परिणामस्वरूप यीस्ट अधिक मात्रा में बढऩे लगते हैं, जिसके कारण डिसबायोसिस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे आपका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है। यहां कुछ आसान उपाय बताए गए हैं, जिनकी सहायता से आप इस स्थिति से निपट सकते हैं- धूम्रपान और शराब का सेवन करना छोड़ दें। सभी सोडायुक्त पदार्थ छोड़ दें। चॉकलेट, मीठे पदार्थ और स्टार्च युक्त पदार्थ न खाएं।

इसके अलावा सभी दुग्ध उत्पाद, वसा युक्त और मसालेदार पदार्थ, चाय और कॉफी आदि का सेवन भी न करें। पानी अधिक पिएं। सही भोजन करें, हल्का तथा आसानी से पचने वाला खाना खाएं, क्योंकि एंटीबायोटिक्स लेने के कुछ महीनों बाद तक भी आपकी पाचन प्रक्रिया में थोड़ी गड़बड़ी रहती है।

पुदीने की पत्तियां :

एक गिलास पानी में पांच पुदीने की पत्तियां, अदरक और लगभग आधा छोटा चम्मच अजवायन मिलाकर तब तक उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए। दिन में तीन बार आधा-आधा गिलास पिएं।

व्यायाम :

हल्का-फुल्का व्यायाम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बस नियमित तौर पर इसे करें।

लहसुन :

लहसुन भी एक चमत्कारी औषधि है, जो रसोईघर में उपलब्ध होती है। इसमें उपस्थित अलिसिन शरीर से एंटीबायोटिक्स को बाहर निकालता है।

विटामिन्स :

विटामिन ए, सी, ई, जिंक और सेलेनियम भी बहुत सहायक हैं।

कब्ज न होने दें :

सत ईसबगोल और अलसी के बीज न केवल मल त्याग में सहायक होते हैं, बल्कि अतिरिक्त मात्रा में पानी को अवशोषित करके डायरिया से भी राहत दिलाते हैं।

एलोवेरा का रस :

एलोवेरा का रस आंतों की परत की रक्षा करता है।

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