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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बाबा कश्मीर सिंह भूरी वाले को सौंपा काम

अमृतसर
दुनियाभर में अपनी स्वर्णिम छटा के लिए मशहूर सिखों के सबसे बड़े धर्मस्थल श्री दरबार साहिब के चारों प्रवेश द्वार भी अब 40 किलो सोने से चमकेंगे। इनको सोने की पतरों से सजाया जाएगा। इसके पहले चरण के तहत घंटा घर साइड के प्रवेश द्वार (मेन गेट) की दर्शनी ड्योढ़ी के गुंबदों पर पतरे चढ़ाने का काम शुरू भी कर दिया गया है। परते लगाने की कार सेवा का जिम्मा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बाबा कश्मीर सिंह भूरीवाले को सौंपा है।

बाबा भूरी वाले के प्रवक्ता राम सिंह के मुताबिक मुख्य द्वारों के चारों गुंबदों के अलावा 4 छोटे गुंबद, 50 छोटी गुंबदियां और 2 पालकी हैं। सभी पर सोना लगाने का काम अगले साल की बैसाखी तक पूरा हो जाएगा। इस काम पर 40 किलो से अधिक सोना लगेगा। बताते चलें कि श्री दरबार साहिब के 4 प्रवेश द्वार हैं। घंटा घर वाली साइड के प्रवेश द्वार के गुंबदों की कार सेवा मुकम्मल होने के बाद दूसरे प्रवेश द्वार भी सोने से सजाए जाएंगे।

संगत अपनी श्रद्धा के मुताबिक पैसे व सोना चढ़ाती है

गौरतलब है कि बाबा भूरी वाले ही श्री दरबार साहिब की दर्शनी ड्योढ़ी के ऐतिहासिक दरवाजों की सेवा भी करवा रहे हैं। सोना चमक न छोड़े इसलिए 22 परतें चढ़ाई गईं। 16 गेज तांबे के पतरों पर पारे की मदद से सोने की 22 परतें चढ़ाई गई हैं। समय के साथ-साथ धूप और बारिश के कारण सोने की चमक खराब न हो, इसके लिए इतनी परतें चढ़ाई जाती हैं। कार सेवा करवाने वालों की ओर से संगत के चढ़ावे के लिए गोलक लगाई जाती है। इसमें संगत अपनी श्रद्धा के मुताबिक पैसे व सोना चढ़ाती है।

यहां से ही सारा प्रबंध किया जाता है। गुरुघर के लिए किसी व्यक्ति विशेष से सहायता नहीं मांगी जाती। बाबा भूरीवाले को सेवा नवंबर 2017 में मिली। इसके बाद उन्होंने सोने से पतरें बनाने की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि गुंबदों पर सोना लगाने से पहले उसकी तैयारी के बेस बनाया जाता है। तांबे के बेस पर माहिर कारीगरों की ओर से पारे की मदद से सोना चढ़ाया जाता है।

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