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sheetla ashtami

शीतला अष्टमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है

शीतला अष्टमी का पर्व पूरे उत्तरी भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। शीतला अष्टमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता की पूजा करने एवं व्रत रखने से चिकन पॉक्स यानी माता, खसरा, फोड़े, नेत्र रोग नहीं होते हैं। माता इन रोगों से रक्षा करती हैं…

माता शीतला को मां भगवती का ही रूप माना जाता है। अष्टमी के दिन महिलाएं सुबह ठंडे जल से स्नान करके शीतला माता की पूजा करती हैं और पूर्व रात्रि को बनाया गया बासी भोजन (दही, राबड़ी, चावल, हलवा, पूरी, गुलगुले) का भोग माता को लगाया जाता है। ठंडा भोजन खाने के पीछे भी एक धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला को शीतल, ठंडा व्यंजन और जल पसंद है। इसलिए माता को ठंडे (बासी) व्यंजन का ही भोग लगाया जाता है। परिवार के सभी सदस्य भी ठंडे पानी से स्नान करते हैं और रात में बनाया हुआ बासी भोजन ही करते हैं। इससे माता शीतला प्रसन्न होती हैं।

माता की पौराणिक कथा

शीतला माता के संदर्भ में अनेक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार एक दिन माता ने सोचा कि धरती पर चल कर देखें कि उसकी पूजा कौन-कौन करता है। माता एक बुढिय़ा का रूप धारण कर राजस्थान के डूंगरी गांव में गईं। माता जब गांव में जा रही थीं, तभी ऊपर से किसी ने चावल का उबला हुआ पानी डाल दिया। माता के पूरे शरीर पर छाले हो गए और पूरे शरीर में जलन होने लगी। माता ने दर्द में कराहते हुए गांव में सभी से सहायता मांगी, लेकिन किसी ने भी उनकी नहीं सुनी।

गांव में एक महिला ने जब देखा कि एक बुढिय़ा दर्द से कराह रही है, तो उसने माता को बुलाकर घर पर बिठाया और बहुत सारा ठंडा जल माता के ऊपर डाला। ठंडे जल से माता को उन छालों की पीड़ा में काफी राहत महसूस हुई। फिर महिला ने माता से कहा- माता, मेरे पास रात के दही और राबड़ी हैं, आप इनको खाइए। रात के रखे दही और ज्वार की राबड़ी खाकर माता को शरीर में काफी ठंडक मिली। फिर महिला ने माता को कहा- माता आपके बाल बिखरे हैं इनको गूथ देती हूं।

वो जब बाल बनाने लगी, तो बालों के नीचे छुपी तीसरी आंख देखकर डर कर भागने लगी। तभी माता ने कहा- बेटी डरो मत, मैं शीतला माता हूं और मैं धरती पर यह देखने आई थी कि मेरी पूजा कौन करता है। फिर माता असली रूप में आ गईं। वह महिला शीतला माता को देखकर भाव विभोर हो गई। उसने माता से कहा- माता मैं तो बहुत गरीब हूं। आपको कहा बिठाऊं। मेरे पास तो आसन भी नहीं है। माता मुस्कुराकर महिला के गधे पर जाकर बैठ गईं और झाड़ू से महिला के घर की सफाई कर डलिया में डाल कर उसकी गरीबी को बाहर फेंक दिया।

माता ने महिला के श्रद्धा भाव से खुश होकर वर मांगने को कहा। महिला ने हाथ जोड़कर कहा- माता आप वर देना चाहती हैं तो आप हमारे गांव में ही निवास करें और जो भी इंसान आपकी श्रद्धा भाव से सप्तमी और अष्टमी को पूजा करे और व्रत रखे तथा आपको ठंडे व्यंजन का भोग लगाए, उसकी गरीबी भी ऐसे ही दूर करें। पूजा करने वाली महिला को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दें। माता शीतला ने कहा- बेटी ऐसा ही होगा।

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