googa peer maharaj

एक महीने के लिए श्रृष्टि की रक्षा करते हैं गुगा महाराज

हिमाचल दस्तक।। हिमाचल पृष्ठ भूमि में अलग-अलग देवी देवताओं का अलग-अलग इतिहास रहा है। देव भूमि से विख्यात हिमाचल में देवी देवता वर्ष भर अपना पहरा देते रहते हैं, लेकिन पूरे वर्ष में एक मास ऐसा भी आता है जब इन देवी देवताओं का इस धरती पर कोई प्रभाव नहीं रहता। जी हां ये महीना होता है भादों मास का, जिसमें पृथ्वी के समस्त देवता गण श्रृष्टि की रक्षा छोड़ असुरों के साथ युद्ध करके अपनी शक्तियों का प्रर्दशन करने अज्ञात प्रवास पर चले जाते हैं।

अज्ञात वास पर एक मास तक देवताओं तथा असूरों में अपनी अपनी शक्तियों के प्रदर्शन को लेकर भयंकरयुद्ध होता है। जिसमें अक्सर देवताओं की ही जीत होती है। मान्यता है कि इस जीत से धरती पर खुशहाली होती है तथा फसल भी अच्छी होती है। ऐसे में अगर देवी देवता असुरी ताकत से हार जाते हैं तो भयंकर अकाल व तबाही होने की संभावना जताई जाती है।

मान्यता ऐसी भी है कि देवताओं के पृथ्वी से अज्ञात वास जाने के दौरान देवता लोग श्रृष्टि की रक्षा का जिम्मा गुगा महाराज पर छोड़ देते हैं जो कि एक मास तक चलता है। भादो मास के अंत में जब देवता लोग असूरी ताकतों से लड़ाई लड़ कर पृथ्वी में लोटते है तो गुगा महाराज को पृथ्वी की रक्षा की जिम्मेदारी से भारमुक्त कर दिया जाता है। ऐसे में एक बार फिर गुगा महाराज के मंदिर का कपाट बंद और देवताओं के मंदिर का कपाट खुल जाता है।

उधर देवता के कार-करींदों के भादों मास को काला मास यानि काले महीने की संज्ञा भी दी गई है। हालांकि आज के युग में इस बात पर कोई भी यकीन नहीं करेगा, लेकिन उनका मानना है कि जिन घरों में दंपतियों की नई-नई शादी हुई है उनकी नई नवेली दुल्हन इस अंधेरे मास में अपनी सास का मुंह नहीं देखेगी। अगर कोई बहु अपनी सास का चेहरा इस मास देख ले तो इसे अपशकुन भी माना जाता है।

ऐसे में गांव स्तर पर कई नई-नवेली दुलहन को एक मास के लिए अपने माईके भेज दिया जाता है ताकि वो अपनी सास का चेहरा न देख सके।

अंधेरे मास में एक सप्ताह तक चलता है गुगा त्योहार

गुगा त्योहर की शुरूआत राखी के दिन से ही हो जाती है तथा एक सप्ताह तक यह त्योहार चलता है और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक ये त्योहार चला रहता है। गुगा पीर की गाथाओं को भकजन अलग-अलग मंडलीयां बनाकर सोना, चांदी, पीतल, तांबा तथा भोजपत्रों का छतर बनाकर घर-घर में गुगे की गाथाएं सुनाते व गाते रहते हैं। वहीं लोग भी गुगे का अपने अपने घरों में बड़ी ही श्रद्धा-भाव से आदर व सम्मान करके गुगा दक्षिणा भेंट कते हैं।

लोगों का मानना है कि गुगे वर्ष में मात्र एक दिन के दर्शन करने से सारी मुसीबतें टल जाती है। गांव में लोग अपने-अपने घरों में मन की मुरादें पूरी करने के लिए गुगा जगरात रखवाते हैं और रात भर गुगे का भजन किर्तन व गुगा गाथा सुनाई जाती है। सप्ताह के अंत में विभिन्न क्षेत्रों से आए सभी गुगे को किसी विशेष स्थान पर बुलाकर गुगे के मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान विभिन्न गुगा समूह के लोगों को सम्मानित करके विशेष प्रकार की पूजा यानी रच्छया का भी आयोजन किया जाता है।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams