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दिव्या Kailash पर्वत के बारे में कुछ अद्भुत और रहस्य मय बातें

Kailash पर्वत जो भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है या हिन्दुओं का सबसे पवित्र तीर्थ सथल भी है यह एक ऐसा भव्य पर्वत शिखर है जिसके सामने सब फिक्के लगते है. आप ने जितने भी सूंदर और मनमोहक दृष्य देखें होंगे सब के सब इस कैलाश के भव्य उपस्थिति के आगे धुंदला पड़ जाता है. यहा की कठिनाइयां मांसपेशियों की पीड़ा और ख़राब मौसम एक समय तक यह यात्रा आपके लिए बहुत पीड़ा दायक बन जाती है, पर एक बार कैलाश का भव्य रूप देख लेने के बाद यह सब कुछ सामान्य लगने लगता है इन सब के बाबजूद भी कैलाश पर्वत  एक रह्स्य मय पर्वत है. जिसमे आज भी कई राज दफ़न है.

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दोस्तों आज हम औपको इस दिव्या कैलाश पर्वत के बारे में कुछ अद्भुत और रहस्य मय बातों को बताएंगे जिसे सुन कर आप भी कैलाश यात्रा की तरफ आकर्षित होंगे।

कैलाश पर्वत समुन्द्र सतह से 22068 फुट ऊँचा है तथा हिमालय से उत्तरी क्षेत्र तिब्बत में स्थित है क्युकी तिब्बत चीन के अधीन है, अतः कैलाश पर्वत चीन में आता है. जो चार धर्मो तिब्बती बौद्ध और सभी देश के बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केंद्र है.

कैलाश पर्वत के चारो दिशों से चार नदियों का उद्गम हुआ है भ्रमपुत्र, सिंधु, सतलुज, व कर्णाली। कैलाश के चारो दिशाओ में विभिन जानवरों के मुख है, जिसमे से नदियों का उधगम होता है. पूर्व में अश्व मुख है पश्चिम में हाथी का मुख है उतर में सिंह का मुख है तथा दक्षिण में मोर का मुख है।

मानसरोवर झील से घिरा होना कैलाश पर्वत की धार्मिक प्रवक्ता को अधिक बढ़ाता देता है।

कैलाश पर्वत को धरती का केंद्र माना जाता है. इसका मतलब कैलाश पृथ्वी के मध्य भाग में स्थित है. इस शिखर की आकृति विराट शिवलिंग की तरह है. यह सदैव वर्फ से ढका रहता है। इसकी परिक्रमा का भी महत्व कहा गया है. तिब्बत के लोग मानसरोवर की 3 अथवा 13 प्रक्रिया का महत्व मानते है। और अनेक यात्री दंड प्रणिपात करने से एक जनम का 10 प्रक्रिमा करने से एक कल्प का पाप नष्ट हो जाता है, जो प्राणी 108 वार परिक्रमा पूरा करता है उन्हें इस जनम और मृत्यु से मुक्ति मिल जाती है, कैलाश परस्थित बुद्धभगवान के अलौकिक रूप डैमचौक बौद्ध धर्म बालो के लिए पूजनीय है. बह बुध के इस रूप को धर्मपाल की संघ्या देते है. बौद्ध धर्म बालों का मानना है की इसी स्थान पर आ कर उन्हें निर्वाण की प्राप्ति होती है. जबकि जैन धर्म की यह मान्यता है की आदिनाथ रेशव देव का यह निर्माण स्थल अष्ट पद है. कहते है रेशव देव ने 8 पग में ही कौलश की यात्रा पूरी की थी।

हिन्दू धर्म के अनुयाइयों की मान्यता है की कैलाश पर्वत मेरु पर्वत है जो भ्रमांड की धुड़ी है और यह भगवान शंकर का प्रमुख निवास स्थान है। यह देवी स्ति के शरीर का दया हाथ गिरा था तथा इसी लिए यह एक पाषाण शिला को उसका रूप मान कर उसको पूजा जाता है।

कुछ लोगो का मानना यह भी है गुरुनानक देव जी ने यह कुछ दिन रुक के ध्यान किया था इसी लिए सिखों के लिए भी यह पवित्र स्थान है इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगो और ध्वनि तरंगो का अद्भुत समागम होता है. जो ॐ की प्रति-ध्वनि करता है इस पवन स्थल को भारतीय दर्शन के हृदय की उपमा दी जाती है। जिसमें भारत की सभ्यता की झलक प्रतिबिम्बित होती है. कैलाश पर्वत की तलछटी में कल्प बृक्ष लगा हुआ है.

पौराणिक मान्यता के अनुसार यह जगह कुबेर की नगरी है

कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चमी को रूबी, और उत्तर को स्वर्ण रूप का मन जाता है। एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार यह जगह कुबेर की नगरी है। यही से महा विष्णु के कर कमलो से निकल कर गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है। जहां भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में भर धरती में निर्मल धाराओं के रूप में प्रवाहित करते है पर कैलाश पर्वत पर कैलाश शिव सदा विराजे है। जिसके ऊपर स्वर्ग और निचे मृत्यु लोक है। इसकी भरी परिधि 92 k.m. की है यहां मानसरोवर पहाड़ से घिरी झील है। जो पुराणों में छीरसागर के नाम से वर्णित है। छीरसागर कैलाश से 40 k.m. की दुरी पर है।

Mount Kailash जिसके बारे में यह कहा जाता है की इसी में शेष शयीया पे भगवान विष्णु व् माता लक्ष्मी विराजित हो पुरे संसार को संचालित कर रहें है। यह छीरसागर भगवान विष्णु का स्थाई निवास है। जब की हिन्द महासागर अस्थाई निवास है। ऐसा माना जाता है महाराज मानदता ने मानसरोवर झील की खोज की थी और कई वर्षों तक इसके किनारे तपस्या भी की थी जो की इन पर्वतों की तालहटी में स्थित है।

बौद्ध धर्म बालो का मानना है कि इसके केंद्र में एक वृक्ष मौजूद है जिसके फलों में चिकत्सीय गुण है जो सभी प्रकार के शारीरिक व् मानसिक रोगों का उपचार करने में सक्षम है हलाकि कैलाश मानसरोवर से जुड़े हज़ारो रहस्य पुराणों में भरे पड़े है। शिव पुराण, स्कन्द पुराण, मत्स्य पुराण आदि में कैलाश खुंड नाम से एक अलग ही अध्यायी है यहां की महिमा का गुणगान किया गया है यह तक पहुंच कर ध्यान करने वालो को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भारतीयों का यह प्रमुख स्थल है यह की जाने वाली तपस्या तुरंत ही मोक्ष प्रदान करने वाली होती है.

इन सब के इलावा माउंट कैलाश से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है जिसके बारे में सुन कर आप हैरान हो जाएंगे

क्या आपको पता है ? आज तक कोई भी मनुष्य कैलाश के शिकार पर नहीं चढ़ पाया। जहा एक तरफ दुनिया भर के पर्वता रोहियों ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर फ़तह कर ली है. जिसकी ऊंचाई 8840 Meters है वहीं दूसरी तरफ तमाम कोशिशों के बादजूद भी आज तक कोई भी मनुष्य या पर्वता रोहि कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया। जिसकी ऊंचाई 6638 meter है जबकि माऊंट कैलाश की ऊंचाई माउंट एवेरेस्ट से 2210 Meters काम है.

Mount Kailashअब माउंट कैलाश पर चढ़ने पर रोक लगा दी गयी है। पर उस से पहले इस पर चढ़ने के कई प्रयास किये गए। पर कोई भी मनुष्य सफल नहीं हो पाया। आखिर कैलाश पर्वत पर कोण रोक देता है पर्वत रोहियों के पाऊं। आखिर क्यों घवराते है पर्वत रोहि माउंट कैलाश पर जाने से, पर्वत रोहियों का क्या का कहना है माउंट कैलाश के बारे में, कैलाश पर्वत दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत नहीं है, तब भी यह अजय है

आखिर क्या है इसके अजय होने का कारण, क्या सच में भगवान शिव देवा दी देवा महादेव इस पर्वत शिखर पर रहते है

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